
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुई बारिश के चलते 4700 करोड़ रुपए की लागत से बना कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही धंस गया. एक्सप्रेस वे के धंसने के बाद अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं. कानपुर लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्धाटन बीते 13 जुलाई को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था.
कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे के कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में उन्नाव के कोरारी के पास मिट्टी धंसने के कारण सड़क धंस गई है जिसके कारण लम्बी-लम्बी लाईनें बन गई है और उनमें पानी भरा नजर आ रहा है. वीडियो सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी की तरफ से सड़क का मेंटिनेंस कर दिया गया है. निर्माण एजेंसी की तरफ से कहा गया कि जहां सड़क खराब हुई है वहां पर पैच वर्क कर दिया गया है.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
एक्सप्रेस के धंसने का वीडियो समाजवादी पार्टी मीडिया सेल पर शेयर किया गया जिसमें सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए लिखा कि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ जनता के पैसों से बने हजारों करोड़ के ग्रीनफील्ड कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था. वह 12 दिन के अंदर उसका हाल देख लीजिए, धंस गया है.
इस दौरान सपा ने भाजपा पर भ्रष्टाचार और जनता के पैसों को लूट कर खाने का आरोप लगाया. ये भी कहा कि भाजपा जनता का पैसा खाकर देश को खोखला कर रही है. उसके बाद ईमानदारी के चोंचलेबाजी और बकवास मंचों से करते हैं.
भ्रष्टाचार के लगे आरोप
वहीं इस मामले पर सदर विधायक ने सपा के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई काम नहीं है. उन्होंने कहा कि नई बनी हुई, सड़क में बारिश के दौरान यह दिक्कत आती है. उन्होंने कहा कि जहां भी सड़क खराब होगी, वहां सड़क बना दी जाएगी. इसके साथ ही विधायक ने कहा की विपक्ष के पास कोई एजेंडा नहीं है, इसलिए घूम-घूम कर छोटी छोटी समस्या लाकर पूरी व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाने का काम करती है.
63 किलोमीटर लंबा है एक्सप्रेसवे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 63 किलोमीटर लंबा और 6-लेन का हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर है, जिसका उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर अब सिर्फ 35 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है, जो पहले लगभग दो से तीन घंटे का होता था.
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