नई दिल्ली। केरल के राज्यपाल (Governor of Kerala) राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेक (Rajendra Vishwanath Arlake)र ने इतिहास लेखन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास (History of India) की कई प्रचलित व्याख्याओं की दोबारा समीक्षा और आलोचनात्मक विश्लेषण की जरूरत है, क्योंकि कई कथाएं पर्याप्त प्रमाण के बिना ही लंबे समय तक तथ्य के रूप में पढ़ाई जाती रही हैं।
अर्लेकर ने यह बात लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां डॉ. पी. राधाकृष्णन नायर की किताब ‘10000 Years of Indian History: Truth and Myth’ का विमोचन हुआ।
राज्यपाल ने कहा कि भारत का बड़ा हिस्सा ऐसा इतिहास है, जिसे आक्रमणकारियों के दृष्टिकोण से लिखा गया। उनके अनुसार, ऐसे विवरणों में कई बार उनके हित और पक्षपात झलकते हैं, जिससे पीढ़ियों तक गलत धारणाएं स्थापित हो जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आक्रमणकारी अपने कृत्यों को सही ठहराने के लिए इतिहास को अपने हिसाब से प्रस्तुत करते थे, जबकि भारत की परंपरा दूसरों पर अपनी संस्कृति थोपने की नहीं रही है।
अर्लेकर ने आर्य आक्रमण सिद्धांत जैसे विषयों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें लंबे समय तक बिना पर्याप्त साक्ष्यों के अकादमिक पाठ्यक्रमों में पढ़ाया गया। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहा कि ऐसे विचारों को बिना सवाल किए तथ्य मान लिया जाता था।
उन्होंने जर्मन विद्वान मैक्स मूलर का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ विदेशी इतिहासकारों की व्याख्याओं में बाद में त्रुटियां और पूर्वाग्रह सामने आए।
राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत के पास इतिहास को नए सिरे से देखने का अवसर था, लेकिन कई पुरानी धारणाएं आज भी जारी हैं। उन्होंने मौजूदा शैक्षणिक ढांचे में सुधार की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि इतिहास की नई व्याख्याओं के प्रयासों का अक्सर विरोध होता है।
अर्लेकर ने भारत को एक प्राचीन सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं से जुड़ी सभ्यता बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान देश की एकता और मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
इस कार्यक्रम में पी. एस. श्रीधरन पिल्लई, के. पी. बालचंद्रन, टी. पी. संकरन कुट्टी नायर और जॉर्ज ओनक्कूर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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