
नई दिल्ली। नवरात्रि (Navaratri) से पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) में गरबा और डांडिया आयोजनों (Garba and Dandiya events) को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इन आयोजनों में मुस्लिमों (Muslims) के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस (Amrita Fadnavis) ने इससे अलग राय जाहिर की है। उनका कहना है कि गरबा में शामिल होने वाले व्यक्ति का धर्म प्रवेश का आधार नहीं होना चाहिए। वहीं, राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे (Nitesh Rane) VHP के रुख का समर्थन करते नजर आए हैं।
मुद्दा बढ़ने के बाद भाजपा के सामने भी संतुलन बनाने की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ हिंदुत्व से जुड़े संगठन आयोजनों में पहचान की जांच और प्रवेश को लेकर सख्ती की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की पत्नी का बयान इस बहस को अलग दिशा दे रहा है।
आयोजकों को VHP की नसीहत
नवरात्रि समारोह शुरू होने से पहले VHP कार्यकर्ता गरबा और डांडिया आयोजकों से संपर्क कर मुस्लिमों की एंट्री रोकने की अपील कर रहे हैं। संगठन की ओर से कार्यक्रम स्थल पर आने वालों की पहचान आधार कार्ड के जरिए जांचने की बात कही गई है। डांडिया कार्यक्रमों में शामिल होने वालों को माथे पर तिलक लगाने की सलाह भी दी जा रही है।
VHP का तर्क है कि गरबा और नवरात्रि हिंदू धार्मिक परंपरा से जुड़े आयोजन हैं, इसलिए इनमें शामिल होने वालों की पहचान और उद्देश्य को लेकर आयोजकों को सतर्क रहना चाहिए।
VHP बोली- यह संगठन का अपना स्टैंड
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने संगठन के रुख को दोहराते हुए कहा कि VHP नवरात्रि समारोहों में मुस्लिमों की भागीदारी पर पूरी तरह रोक चाहती है। उन्होंने कहा कि संगठन की अपनी नीतियां और स्पष्ट स्टैंड हैं।
नायर ने सवाल उठाया कि जब इस्लाम में देवी-देवताओं की मूर्ति पूजा की मान्यता नहीं है, तो मुस्लिम नवरात्रि के गरबा और डांडिया आयोजनों में क्यों शामिल होना चाहते हैं।
राणे ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने भी गरबा आयोजनों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू नाम का इस्तेमाल कर ऐसे कार्यक्रमों में प्रवेश करते हैं और हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं। राणे ने इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए कहा कि अगर गरबा और नवरात्रि के कार्यक्रम इस तरह की गतिविधियों का अड्डा बनते हैं तो हिंदुत्व संगठनों और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि इसे रोकें।
हालांकि, अमृता फडणवीस के बयान के बाद राणे के रुख में कुछ नरमी दिखाई दी। उन्होंने कहा कि गरबा में शामिल होने वाले मुस्लिमों को साफ नीयत से कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए।
अमृता फडणवीस ने कहा- सबको साथ लेकर चलें
अमृता फडणवीस ने गरबा में मुस्लिमों की भागीदारी का विरोध नहीं किया। उनका कहना है कि यह ऐसा त्योहार है, जिसमें लोगों को साथ लेकर चलने की भावना होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर कोई मुस्लिम गरबा देखने या उसमें शामिल होने आता है, कार्यक्रम का आनंद लेता है और बिना किसी विवाद के वापस चला जाता है तो इसमें उन्हें कुछ गलत नहीं लगता।
राणे के बयान पर सवाल पूछे जाने पर अमृता ने कहा कि उन्होंने कुछ सोच-समझकर ही ऐसा कहा होगा और वह इसकी गहराई में नहीं जाना चाहतीं। हालांकि उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी नजर में गरबा में शामिल होने का आधार किसी व्यक्ति का धर्म नहीं होना चाहिए।
‘गरबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया जाता है’
अमृता फडणवीस ने गरबा को व्यापक सांस्कृतिक उत्सव बताते हुए कहा कि यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया जाता है। उनका कहना है कि किसी भी समुदाय या धर्म का व्यक्ति यदि शांतिपूर्वक और बिना किसी हंगामे के गरबा देखने या उसमें शामिल होने आता है तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस विषय के पीछे बताए जा रहे अन्य कारणों की गहराई से जांच नहीं की है।
इस पूरे विवाद ने नवरात्रि शुरू होने से पहले महाराष्ट्र में गरबा आयोजनों के स्वरूप, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर है कि नवरात्रि के दौरान आयोजक और प्रशासन इन अलग-अलग दावों और मांगों के बीच किस तरह व्यवस्था संभालते हैं।
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