ब्‍लॉगर

जान-माल के नुकसान की बारिश

– सियाराम पांडेय ‘शांत’

महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अतिवर्षा जन्य बाढ़ ने जान-माल का भारी नुकसान किया है। तेलंगाना में भारी बारिश के बाद जलप्लावन के हालात हैं। तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में बेमौसम बारिश और बाढ़ की मार से तकरीबन 50 लोगों की मौत हो चुकी है। रामनाथपुरा की सड़कें समुद्र बनी हुई हैं। हैदराबाद के कई इलाके जलमग्न हो चुके हैं। वहां बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। तेलंगाना सरकार की मानें तो बाढ़ से राज्य को करीब 5 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। तेलंगाना सरकार ने केंद्र से मदद की मांग की है। यह समस्या जितनी अतिवर्षा की है, उससे कहीं अधिक बांधों के जल के समन्वयन के अभाव की है। जिन राज्यों में बांध बनाए गए हैं, उन राज्यों का पानी के अत्यधिक इस्तेमाल का मोह भी नदी के प्रवाह वाले राज्यों में बाढ़ और जान-माल के नुकसान का सबब बनता रहा है। बांध टूट जाए तो भी और उससे पानी छोड़ा जाए तो भी।

हाल के दिनों में आंध्र प्रदेश में इतनी बरसात हुई कि नागार्जुन सागर बांध के 18 गेट करीब 10 फीट तक खोलने पड़ गए। जिससे बाढ़ का पानी आसपास के इलाकों में घुस गया। गत वर्ष 2019 में मुंबई से 250 किलोमीटर दूर रत्नागिरी जिले में तिवारे बांध 15 साल में ही टूट गया था। 2004 में बने इस बांध के टूटने से 18 लोग मर गए जबकि 25 से ज्यादा अब भी लापता हैं। हजारों एकड़ फसल तबाह बर्बाद हो गई थी। नेपाल और चीन द्वारा अपने यहां बने बांधों से भारी मात्रा में पानी छोड़ने से हर साल भारत में कितनी तबाही होती है, यह किसी से छिपा नहीं है। इस पीड़ा को बिहार, उत्तर प्रदेश और असम से बेहतर भला और कौन जानता है। वहां हर साल अत्यधिक वर्षा से बाढ़ नहीं आती। चीन और नेपाल में बने बांधों से पानी छोड़े जाने की वजह से आती है।

भारत विश्व का तीसरा ऐसा देश है जहां सबसे अधिक बांध हैं। देश में 25 प्रतिशत बांध 50 से 100 वर्ष पहले बने हैं और 80 प्रतिशत बांधों का निर्माण 25 वर्ष या उससे पहले हुआ है। इसमें संदेह नहीं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में कई बड़े बांध ध्वस्त हो चुके हैं। वर्ष 1979 में गुजरात में आई ऐसी ही आपदा में हजारों लोगों की जान चली गई थी। भारत में अबतक बने 10 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले 5344 बांधों में से 92 फीसद बांध अंतरराज्यीय सीमा पर बने हैं यानी बांध एक राज्य में है और नदी का निचला बहाव वाला हिस्सा दूसरे राज्य में है। बांध वाले राज्य में अत्यधिक वर्षा होने का खामियाजा बहाव वाले राज्यों को भुगतना पड़ता है। विडंबना इस बात की है कि तकरीबन चालीस साल पहले संसद में बांध सुरक्षा बिल लाया गया, जो आजतक पास नहीं हो सका है। इसमें प्रावधान है कि नदियों की छाती पर किए गए निर्माण की चौकसी, निरीक्षण, रखरखाव और परिचालन सही तरीके से हो और जिम्मेदारी तय की जा सके। बांध इस देश की जरूरत हैं लेकिन उसके जितने फायदे हैं, उतने ही नुकसान भी हैं। फायदों के लिए नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पश्चिमी महाराष्ट्र के तीन जिलों में बारिश ने जमकर कोहराम मचाया है। सोलापुर संगली और पुणे में भारी बारिश के बाद बाढ़ से अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। कई दिनों से पश्चिमी महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने मुंबई में भारी बारिश की चेतावनी देने के साथ ही येलो अलर्ट जारी कर रखा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से अलर्ट पर रहने का आग्रह किया है। केंद्र सरकार से मदद मांगी है। एनडीआरएफ की टीमों को ओसमानाबाद, सोलापुर, पंढरपुर और बारामती में तैनात किया गया है। पुणे के जनता वसाहट स्ट्रीट नंबर-29 में रात के वक्त 18 इंच पानी की पाइप लाइन फट गई। इसके बाद पूरी बस्ती में पानी भर गया। घटना में 9 लोग घायल हो हैं। इनमें से 5 को ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों को भारती विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से बात की है। उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। लेकिन बाढ़ से बचाव को लेकर राज्य सरकारें गंभीर क्यों नहीं हो पाती, यह चिंताजनक बात है। एक-दो दिनों की सामान्य बारिश में भी महाराष्ट्र खासकर मुम्बई में नाव चलने लगती है। जब नदी-नालों पर अतिक्रमण हो जाए, उनके जल अधिग्रहण क्षेत्र पर भी भवन और कार्यालय खड़े हो जाएं तो जरा सी बारिश में पानी सड़कों पर नहीं तो और कहां बहेगा? महाराष्ट्र और कर्नाटक में भारी बारिश और बाढ़ से हालात काफी गंभीर हैं। एक तरफ जहां कर्नाटक में लगातार हो रही बारिश के बीच प्रमुख बांधों का पानी छोड़े जाने से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है तो वहीं महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ के कारण कई लोगों की मौत हो गई है। उत्तर कर्नाटक में पिछले तीन महीने में तीसरी बार बाढ़ आई है। इस क्षेत्र के बेलगावी, कलबुर्गी, रायचुर, यादगिर, कोप्पल, गोदाग, धारवाड़, बागलकोट, विजयपुरा और हावेरी इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि मुंबई की बारिश के पानी का इस्तेमाल सिंचाई, शहर के आसपास के उद्योगों और नासिक तथा अहमदनगर जैसे शहरों में बागवानी के लिए किया जाए। गडकरी ने पत्र में कहा कि अतिरिक्त पानी को सूखा प्रभावित इलाकों में घरेलू और अन्य इस्तेमाल के लिए भी ले जाया सकता है, ताकि जल की कमी से पार पाया जा सके। यदि व्यवस्थित रूप से योजना बनाई जाए तो बाढ़ के पानी, नाले और सीवेज को ठाणे की ओर मोड़ा जा सकता है और इस पानी को रास्ते में शोधित कर एक बांध में रखा जा सकता है। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई और शहर के आसपास के उद्योगों तथा नासिक एवं अहमदनगर जैसे नगरों में बागवानी के लिए किया जा सकता है। बकौल गडकरी, यह योजना मुंबई में मीठी नदी की वजह से उत्पन्न होने वाली परेशानियों के समाधान में सहायक हो सकती है। उन्होंने मीठी नदी पर एक बैराज बनाने का प्रस्ताव भी दिया है ताकि पानी समुद्र में प्रवाहित किया जा सके।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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