
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों 10 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई. बाजार में पहले आशंका थी कि ईरान-सम्बंधित तनाव के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ता. गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
हालांकि, ताजा संकेतों में यह स्पष्ट हुआ कि मार्ग पूरी तरह खुला है और जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है. इससे सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हुआ और बाजार में घबराहट घटने के साथ ही कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई.ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जबकि WTI क्रूड भी फिसलकर 83-86 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया.
निवेशकों ने की मुनाफावसूली
बाजार के जानकारों के मुताबिक हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे गिरावट और तेज हो गई. इसके अलावा, सीजफायर और बातचीत की संभावनाओं ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है.
सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल
कच्चे तेल में गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए राहत भरी खबर है. इससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.महंगाई दर में नरमी आ सकती है और शेयर बाजार को भी सपोर्ट मिल सकता है. बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों की दिशा अब पूरी तरह से भूराजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी.
यदि तनाव और कम होता है तो कीमतों में और गिरावट संभव है, लेकिन किसी भी नए विवाद से बाजार में फिर उछाल आ सकता है. माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी तेजी देखी जा सकती है. वहीं पेंट्स बनाने और टायर बनाने वाली कंपनियों के शेयर में तेजी दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा तेल कंपनियों के शेयरों में भी हलचल देखी जा सकती है.
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