तेहरान। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच जारी संघर्ष के बीच दक्षिणी ईरान (Southern Iran) में एक बार फिर धमाकों की खबरों ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। शनिवार, 7 नवंबर की शाम क्यूशम (केश्म) द्वीप पर एक के बाद एक दो जोरदार धमाके सुने गए। इसके अलावा जास्क, बंदर अब्बास और सिरिक में भी विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देने की खबरें हैं। ये सभी इलाके रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित हैं। ऐसे में ताजा घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच संघर्ष फिर तेज होने की आशंका बढ़ा दी है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, केश्म द्वीप के पूर्वी हिस्से में दो धमाके हुए। शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में द्वीप पर मिसाइल हमले की आशंका जताई गई थी। हालांकि, ईरान से जुड़े एक सूत्र ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि धमाकों का संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी सैन्य गतिविधियों और समुद्री यातायात के प्रबंधन से हो सकता है। फिलहाल धमाकों की वास्तविक वजह और उनसे हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दक्षिणी ईरान ही क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दरअसल, ईरान का दक्षिणी इलाका उसकी सैन्य और आर्थिक ताकत का प्रमुख केंद्र है। यहां कई महत्वपूर्ण बंदरगाह, तेल निर्यात के रास्ते और सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। केश्म द्वीप और बंदर अब्बास की भौगोलिक स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से यह क्षेत्र लगातार संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तथा कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। दोनों पक्षों के बीच समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और ईरान के सैन्य संसाधनों को लेकर टकराव जारी है।
अमेरिका की नाकेबंदी, ईरान का जवाब
फिलहाल अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। इसके जवाब में ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने केश्म द्वीप पर सीमित सैन्य हमले भी किए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल में केश्म द्वीप पर सीमित हमले की पुष्टि की थी। अमेरिकी पक्ष ने इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताया, जबकि ईरानी पक्ष की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए, जिससे उनमें आग लग गई। हालांकि, इस घटना की पूरी परिस्थितियों और नुकसान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने भी हाल में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे एक वाणिज्यिक जहाज के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी है। इससे क्षेत्र में समुद्री यातायात और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव और बढ़ गया है।
क्या फिर तेज होगा अमेरिका-ईरान संघर्ष?
ताजा धमाकों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर व्यापक रूप लेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि केश्म, जास्क और अन्य इलाकों में सुनी गई धमाकों की आवाजें किसी सीधे अमेरिकी या इजरायली हमले का परिणाम थीं या ईरान की सैन्य गतिविधियों का हिस्सा।
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां इस क्षेत्र की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना रही हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और सैन्य गतिविधियां तय करेंगी कि तनाव कम होता है या पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।
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