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रतन टाटा के बेहद करीबी है एन चंद्रशेखरन, आए थे इंटर्नशिप करने, अब संभाल रहे कंपनी की कमान

नई दिल्‍ली (New Delhi) । रतन टाटा (Ratan Tata) के बेहद करीबी एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के हाथ में टाटा ग्रुप की कमान है. पिछले सात सालों से एन चंद्रशेखरन देश की दिग्गज और विश्वसनीय कंपनी टाटा ग्रुप (Tata Group) को संभाल रहे हैं. रतन टाटा इनपर भरोसा करते हैं. एन चंद्रशेखरन ने टाटा कंपनी को 128 अरब डॉलर वैल्‍यू तक पहुंचाया है. टाटा-साइरस मिस्‍त्री विवाद के बाद इन्‍हें टाटा संस (Tata Sans) का चेयरमैन बनाया गया था.

चंद्रशेखरन की पत्नी का नाम ललिता है और उनका बेटा है जिसका नाम प्रणव चंद्रशेखरन है. एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के पास एक आलीशान घर है, जिसे साल 2020 में 98 करोड़ रुपये में मुंबई की पेड्डर रोड पर खरीदा था. वहीं इनकी सैलरी की बात करें तो हर साल चंद्रशेखरन के वेतन में बढ़ोतरी देखी गई है और आज के समय में इनका वेतन (N Chandrasekaran Salary) 100 करोड़ रुपये से ज्‍यादा है.


नई ऊंचाई पर पहुंचा टाटा ग्रुप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रशेखरन की सैलरी 2019 में 65 करोड़ रुपये सालाना थी. साल 2021-22 में इसे बढ़ाकर 109 करोड़ रुपये कर दिया गया था. इस अवधि के दौरान ये भारत में सबसे ज्‍यादा सैलरी पाने वाले बिजनेस एग्‍जीक्‍यूटिव थे. इनकी अगुवाई में टाटा ग्रुप का मुनाफा (Tata Group Profits) 2022 में 64267 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि 2017 में यह मुनाफा 36728 करोड़ रुपये था. इनके पांच साल के कार्यकाल में टाटा ग्रुप का राजस्‍व 6.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.44 लाख करोड़ रुपये हो गया.

इंटर्न से सीईओ तक का सफर
चंद्रशेखरन पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1987 में एक इंटर्न के तौर पर टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विस में (TCS) के साथ जुड़े थे. अगले दो दशक से उन्‍होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर कई कामयाबी हासिल की और अंत में साल 2007 में उन्‍हें टीसीएस के बोर्ड में शामिल किया गया. साथ ही चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर भी बना दिया गया. इसके बाद साल 2009 में 46 साल कर उम्र में टीसीएस के सीईओ बन गए. वह टाटा ग्रुप में सबसे यंग सीईओ थे.

शुरू से ही काफी मेहनती व्‍यक्ति हैं चंद्रशेखरन
गौरतलब है कि एन चंद्रशेखर का जन्‍म 1963 में तमिलनाडु के बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ था. वे शुरू से ही काफी मेहनती थे. साथ ही फिटनेस को लेकर भी काफी सजग रहते थे. अपनी रुटीन से उन्‍होंने कभी भी समझौता नहीं किया. ऑफिस के काम में चाहे कितनी भी देर क्यों न हो जाए वो रोज सुबह 4 बजे उठकर दौड़ते हैं. एन चंद्रशेखरन मैराथन और हॉफ मैराथन में भाग लेने के लिए कई जगहों पर जा चुके हैं.

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