
इन्दौर। अगले महीने प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में मेल-मुलाकात का दौर चल पड़ा है, लेकिन एक मुलाकात ने भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टी में सरगर्मी ला दी है। पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा की कल भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव से हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। हालांकि कांग्रेस को भी प्रदेश में खेला होने का डर सता रहा है, क्योंकि उसके पर एक निर्धारित विधायक संख्या है। राज्यसभा में निर्वाचन के लिए 58 सदस्यों के मत अनिवार्य हैं, जबकि कांग्रेस के पास 62 के आसपास वोट हैं।
वर्तमान में प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस और दो पर भाजपा का कब्जा है। अगले महीने 18 जून को चुनाव होना है और उसके साथ ही दोनों ही दलों के नेताओं ने चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। भाजपा के पास प्रदेश में बहुमत है और वह चाह रही है कि तीसरी सीट पर भी ऐसा खेला हो जाए कि कांग्रेस यहां से बाहर ही हो जाए। कांग्रेस के पास 62 वोट हैं और निर्वाचन के लिए 58 वोट चाहिए, लेकिन भाजपा अगर कांग्रेस में तोड़-फोड़ करती है तो एक तरफा भाजपा प्रत्याशी की जीत हो सकती है। भाजपा ने अभी तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं, लेकिन कांग्रेस से कमलनाथ को राज्यसभा में भेजने की चर्चा चल रही है।
कांग्रेस इस सीट को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहती है, जिस पर अभी दिग्विजयसिंह दो बार से सदस्य हैं। भोपाल में सियासी पारा तो बढ़ ही रहा हैं, वहीं कल कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे सज्जनसिंह वर्मा ने विधायक गोपाल भार्गव से मिलकर इस पारे को और बढ़ा दिया है। इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकारों के अनुसार भार्गव से पूर्व मंत्री का इस तरह मिलना राज्यसभा चुनाव में किसी बड़े गणित की ओर इशारा कर रहा है। वैसे कांग्रेस अभी बचाव की मुद्रा में हैं, क्योंकि अगर कांग्रेस की ओर से खेला किया गया तो उसे राज्यसभा की एकमात्र सीट से हाथ धोना पड़ेगा, जो कांग्रेस नेतृत्व भी नहीं चाहता है। वैसे इस बार राज्यसभा का मुकाबला रोमांचक होने वाला है और 18 जून को ही मालूम पड़ेगा कि खेला कांग्रेस के साथ हुआ या भाजपा के साथ।
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