
इंदौर। मुंबई-दिल्ली (Mumbai-Delhi) सहित देश के बड़े शहरों में काम करने वाले रियल इस्टेट (Real Estate) के खिलाड़ी इंदौर (Indore) और मध्यप्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी से लेकर मास्टर प्लान में देरी के साथ-साथ अन्य नियमों की विसंगति पर सवाल उठाते रहे हैं। पिछले दिनों ही देश के जाने-माने बिल्डर-डवलपर हीरा नंदानी ने भी नियमों की विसंगतियों को लेकर दो टूक बात कही थी। मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में रियल इस्टेट का कारोबार ही सबसे बड़ा और प्रमुख है, जिसे तबाह करने के नित नए प्रयास किए जाते रहे हैं।
इसी कड़ी में इंदौर देश का इकलौता शहर भी बन गया है जहां पर बहुमंजिला इमारतों को कॉलोनी की परिभाषा में शामिल कर लिया, जिसके चलते प्रति फ्लैट में रहने वाले प्रति परिवार के आधार पर नगर निगम ने आश्रयनिधि ठोंक डाली और लगभग 200 नोटिस बिल्डर-कालोनाइजरों को जारी करते हुए 7 दिन में पैसा जमा कराने अन्यथा अनुमति निरस्त करने की चेतावनी भी दे डाली। रियल इस्टेट कारोबारियों की संस्था के पदाधिकारी निगमायुक्त से मिलेंगे, उसके बाद प्रमुख सचिव से और फिर अदालती लड़ाई भी लड़ी जाएगी। अग्रिबाण ने इस विसंगति को उजागर किया और कल क्रेडाई की बैठक में भी सदस्यों ने इस थोपे गए नियम को गलत बताया और एक ही प्रोजेक्ट पर दो-दो बार विकास अनुमति और आश्रयनिधि शुल्क वसूली की जा रही है। दरअसल निगमायुक्त ने 30 जून को एक आदेश जारी किया, जिसमें ग्रुप हाउसिंग, बहुमंजिला इमारतों के साथ-साथ अन्य सभी तरह की गैर आवासीय इकाइयों को भी कॉलोनी की तर्ज पर परिभाषित कर दिया और उन पर विकास अनुमति के साथ-साथ आश्रयनिधि शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया भी शुरू करवा दी। इतना ही नहीं, ताबड़तोड़ सभी 22 झोनों के भवन अधिकारियों के माध्यम से इस तरह के इंदौर में चल रहे लगभग 200 प्रोजेक्टों को नोटिस भी जारी कर दिए गए। इन नोटिसों में कहा गया कि मध्यप्रदेश राजपत्र क्रमांक 353 दिनांक 01.09.2021 में हुए संशोधन के आधार पर निगम अधिनियम के मुताबिक कॉलोनी को जिस तरह परिभाषित किया गया है उसके मुताबिक किसी कॉलोनी के अगर 3100 स्क्वेयर फीट से बड़े भूखंड पर अगर विक्रय के लिए बहु इकाई यानी फ्लेटों का निर्माण किया जाता है तो अनुमति शुल्क के साथ आश्रय शुल्क भी चुकाना पड़ेगा। इस नोटिस में यह भी कहा गया कि 7 दिन के भीतर कॉलोनी सेल से सम्पर्क कर आवश्यक विकास अनुमति शुल्क और आश्रय शुल्क जमा कराकर एनओसी प्राप्त करें अन्यथा एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए जारी की गई भवन निर्माण अनुमति को प्रतिसंहत यानी रिवॉक कर दिया जाएगा। इस तरह के नोटिसों से शहरभर के बिल्डर-कालोनाइजरों में खलबली भी मच गई। खासकर बहुमंजिला प्रोजेक्ट बनाने वाले डवलपर परेशान हो गए कि लाखों-करोड़ों रुपए की अतिरिक्त राशि चुकाना पड़ेगी, जिसके चलते प्रोजेक्ट कॉस्ट तो बढ़ेगी ही, वहीं पूर्व में जो प्रोजेक्ट बिक चुके हैं उनमें अब नए सिरे से राशि कैसे जमा कर पाएंगे। क्रेडाई की कल हुई बैठक में निगमायुक्त से मुलाकात करने और अपना पक्ष रखने के साथ नियमों की विसंगति की जानकारी भी दी जाएगी और उसके बाद भोपाल जाकर प्रमुख सचिव से मुलाकात करेंगे और तत्पश्चात अदालती लड़ाई भी लड़ेंगे।
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