
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पांच देशों का दौरा पूरा कर दिल्ली लौटने पर (After returning to Delhi after completing his Five-Nation Tour) मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक ले रहे हैं (Is holding an important meeting of Council of Ministers) । प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों का एक हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक दौरा पूरा कर गुरुवार सुबह नई दिल्ली लौटे । इस दौरे पर प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली के सेवा तीर्थ में हो रही मंत्रिपरिषद की यह महत्वपूर्ण बैठक इस साल की पहली बैठक है । यह ऐसे समय में हो रही है, जब मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हैं। मंत्रिपरिषद की बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई । इसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए । खबर लिखेजाने तक बैठक जारी थी ।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी विदेश यात्रा की शुरुआत 15 मई को यूएई से की थी और 20 मई को इटली में इसका आखिरी चरण पूरा किया। यह दौरा काफी अहम माना जा रहा था, जिसका मकसद भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना था। यात्रा का मुख्य फोकस लंबे समय तक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना, टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना और भारत के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ मजबूत करना था।
संयुक्त अरब अमीरात में भारत ने एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने के लिए अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी को भारत में कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, यूएई ने भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का भी वादा किया है। भारत और नीदरलैंड ने रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों और ग्रीन हाइड्रोजन पहलों से जुड़े 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन प्रणालियों में नीदरलैंड की विशेषज्ञता को समझने के लिए अफस्लुइटडाइक बांध का भी दौरा किया।
17 से 18 मई के अपने स्वीडन दौरे के दौरान भारत ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को संबोधित भी किया। प्रधानमंत्री मोदी 19 मई को नॉर्वे पहुंचे। यह 43 वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा थी। उन्होंने ओस्लो में हुए तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहां डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेताओं के साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
इटली की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत करते हुए ‘स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया और 2029 तक व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा। दोनों देशों के बीच कृषि, वित्तीय अपराध रोकथाम और भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की इटली में आवाजाही से जुड़े समझौते भी हुए। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उच्चस्तरीय बातचीत में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर भी सहयोग आगे बढ़ा। यह दौरा भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार, जलवायु सहयोग और व्यापार विस्तार जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया।
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