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पुतिन का भारत दौरा: ब्रह्मोस, सुखोई से लेकर S-400 तक कई समझौते करेंगे भारत-रूस

September 11, 2026

नई दिल्ली. रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की भारत (India) यात्रा का केंद्रीय आकर्षण भारत-रूस रक्षा सहयोग होने जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात में रक्षा, ऊर्जा और स्वतंत्र विदेश नीति के मोर्चे पर आज कई बड़े फैसले होने की उम्मीद है। रक्षा गलियारों में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह यात्रा किस तरह दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को नए पायदान पर ले जाएगी। शुक्रवार देर रात दिल्ली आगमन पर पुतिन का स्वागत विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने किया।

सामरिक सौदे प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे में रक्षा सहयोग सबसे ऊपर है। रूस के साथ इस संभावित रक्षा सौदे और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाली ठोस प्रगति से सैन्य तैयारियों को एक नया आयाम मिलेगा।


  • भविष्य की दिशा : यह यात्रा इस बात की परीक्षा है कि कैसे दो देश भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को उन्नत बनाए रख सकते हैं। रक्षा सौदों की नींव, ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच स्वतंत्र कूटनीति का यह मेल भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत और व्यावहारिक रूप देगा।

    ऊर्जा सुरक्षा व परमाणु सहयोग
    पुतिन की यात्रा का दूसरा बड़ा स्तंभ ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग होगा। पश्चिमी देशों के तमाम दबावों के बावजूद दोनों देशों के बीच कच्चे तेल का व्यापार और ऊर्जा साझेदारी मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रपति पुतिन की इस यात्रा के दौरान भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़ी वार्ताओं को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है। इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक समझौतों पर भी मुहर लग सकती है।

    सुखोई-57 : रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के इन विमानों की पेशकश कर रहा है, दोनों पक्ष संभावित खरीद व तकनीक हस्तांतरण पर बातकर रहे हैं।

    ब्रह्मोस का अगला संस्करण : दोनों देश ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण पर चर्चा कर रहे हैं।
    एस-400 : एस-400 वायु रक्षा प्रणाली से जुड़े आगामी समझौते भी महत्वपूर्ण मुद्दा हैं।
    रक्षा उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण : दोनों देश पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़ संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर जोर दे रहे हैं।

    2030 तक व्यापार 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य
    केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और रूस एक नए द्विपक्षीय निवेश समझौते को तेजी से अंतिम रूप दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर पहुंचाया जाएगा। फिलहाल दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर है। नई दिल्ली में बृहस्पतिवार को रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंतोन अलीखानोव के साथ इनोप्रोम इंडिया 2026 के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले 4 वर्षों में व्यापार में करीब 40 अरब डॉलर की वृद्धि करनी होगी।

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