नासिक। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक बीपीओ यूनिट से जुड़े बहुचर्चित मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने शुरुआती एफआईआर (FIR) में संशोधन करते हुए अब SC-ST (Atrocity Prevention) अधिनियम 1989 की धाराएं भी जोड़ दी हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
क्या है नया अपडेट?
26 मार्च को दर्ज एफआईआर में यह नई धाराएं इसलिए जोड़ी गईं क्योंकि शिकायतकर्ता महिला अनुसूचित जाति से संबंधित बताई गई है। इससे अब आरोपियों पर कानूनी दबाव और बढ़ गया है।
अब तक कौन गिरफ्तार, कौन फरार?
पुलिस के मुताबिक, मामले में नामजद अधिकांश आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मुख्य आरोपी निदा खान अभी भी गिरफ्त से बाहर है। उनके वकील ने जल्द ही अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की बात कही है और दावा किया है कि वह गर्भवती हैं।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्निक ने स्पष्ट किया कि निदा खान कंपनी में HR नहीं, बल्कि एक एसोसिएट थी और अब तक किसी अन्य केस से उसका सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
आरोप क्या-क्या हैं?
जांच में सामने आए आरोपों में शामिल हैं:
महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और अश्लील हरकतें
धार्मिक भावनाएं आहत करना
जबरन धार्मिक दबाव और कथित धर्मांतरण
शिकायत करने पर नजरअंदाज या दबाव बनाना
कुछ शिकायतों में यह भी आरोप है कि कर्मचारियों को जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने और खान-पान की आदतें बदलने के लिए कहा गया।
कंपनी की क्या प्रतिक्रिया?
TCS ने कहा है कि उसके पास POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) मैकेनिज्म मौजूद है और पहले कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी।
कंपनी के CEO के. कृतिवासन ने बताया कि जांच के लिए डेलॉइट और ट्राइलिगल जैसी बाहरी एजेंसियों को शामिल किया गया है। साथ ही केकी मिस्त्री की अध्यक्षता में ओवरसाइट कमेटी बनाई गई है।
कंपनी ने यह भी दोहराया कि नासिक यूनिट पूरी तरह चालू है और इसे बंद करने की खबरें गलत हैं।
TCS नासिक केस अब सिर्फ एक कंपनी विवाद नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक जांच का मामला बन चुका है। नई धाराओं के जुड़ने और केंद्रीय एजेंसियों की संभावित एंट्री के बाद आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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