भोपाल

पांच राज्यों में विकास का पोस्टर बनेगा शिव ‘राज’

  • आरएसएस और भाजपा का मिशन इलेक्शन प्लान
  • भाजपा शासित राज्यों के विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ेगी पार्टी

भोपाल। उपचुनाव के अच्छे परिणामों को देखने के बाद भाजपा की नजर अब 2022 में होने वाले पांच राज्यों-उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, पंजाब के विधानसभा चुनावों पर है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार इसको लेकर मंथन कर रहे हैं। मंथन में पार्टी के रणनीतिकारों ने तय किया है कि आगामी चुनाव में भाजपा शासित राज्यों के विकास को मुद्दा बनाकर पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी। खास बात यह है कि पांच राज्यों में मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार के विकास कार्यों को चुनावी पोस्टर बनाकर मैदानी मोर्चा संभाला जाएगा। पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि लगभग सभी राज्यों के नेताओं ने विगत दिनों संघ और भाजपा आलाकमान के सामने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया है। सबका यही कहना है कि कोरोना के चलते लोगों की बदली जिंदगी को भी जल्द से जल्द पटरी पर लाना होगा। इसके लिए केंद्र स्तर पर बड़े और आम लोगों को राहत देने वाले फैसले लेने होंगे। साथ सुझाव दिया गया कि मप्र की शिवराज सरकार ने कोरोना संक्रमण के दौर से लेकर अभी तक उल्लेखनीय कार्य किया है। अत: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शिव ‘राज’ की उपलब्धियों को भाजपा के विकास के उदाहरण के रूप में प्रचारित किया जाए।


चुनाव वाले राज्यों में अगले छह महीने तक सबसे ज्यादा फोकस होगा। सभी सांसद और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र में ज्यादा समय देने के लिए कहा गया है। केंद्रीय मंत्रियों का दौरा बढ़ेगा। जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां के राज्य मंत्रियों को भी अपने क्षेत्र के साथ-साथ आस-पास के विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस करने के लिए कहा गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सभी सांसदों, मंत्रियों और विधायकों से कहा है कि वह जहां भी जाएं पार्टी, सरकार के कामकाज के साथ ही मप्र सरकार के विकास कार्यों की रिपोर्ट जनता के बीच रखें। बताएं कि शिवराज सरकार ने आम जनता के लिए कौन-कौन सी योजनाएं शुरू की और उसका कितने लोगों को लाभ मिला। 

शिवराज की शैली पर करना होगा काम 
संघ और भाजपा आलाकमान ने चुनावी राज्यों के नेताओं को संदेश दिया है कि वे मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शैली में काम करें। गौरतलब है कि भाजपा के लिए आरएसएस के सुझाव और बिंदु काफी अहम होते हैं। संगठन और सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग ही ये सुनिश्चित करते हैं कि संघ के सुझावों को कैसे अमल में लाया जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा के लिए जमीनी स्तर पर संघ ही मजबूत आधार और खाका बनाने का काम करती है। मप्र में शिवराज सत्ता, संगठन और संघ के समन्वय से काम करते हैं। इसलिए उनका कोई भी दांव खाली नहीं जाता है। इसलिए अब चुनावी राज्यों के नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे शिवराज की तरह समन्वय बनाकर काम करें।

तैयार हो रही कल्याणकारी योजनाओं की सूची
संघ सूत्रों के अनुसार भाजपा के रणनीतिकार शिवराज सरकार की उन कल्याणकारी योजनाओं की सूची तैयार कर रहे हैं, जो जनता पर अधिक प्रभाव डाल सके। गौरतलब है कि शिवराज ने हर पारी जी जान से खेली है। वे मुख्यमंत्री के पद को सेवा का माध्यम मानते हैं। शिवराज जब विधायक और सांसद थे, उन 15-16 सालों और मुख्यमंत्री के रूप में 15 सालों को जोड़ें तो उनके जन-कल्याणकारी कार्यों की लंबी फेहरिस्त बन जाएगी। यदि सिर्फ मुख्यमंत्री के कार्यकाल की चर्चा करें तो यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आती है कि मुख्यमंत्री ने बुनियादी क्षेत्रों के विकास को सदैव केन्द्र में रखा है। जहां शिवराज ने प्रथम कार्यकाल में सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी, वहीं द्वितीय कार्यकाल में सिंचाई बढ़ाने का कार्य प्रमुखता से किया गया। इसके पश्चात तृतीय कार्यकाल में विद्युत उत्पादन बढ़ाने और उसके सुचारु प्रदाय पर ध्यान दिया गया। मार्च 2020 से प्रारंभ कार्यकाल में शिवराज ने स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की सुविधाओं का विस्तार किया है। अब भाजपा के रणनीतिकार प्रभावी योजनाओं की सूची तैयार कर रहे हैं, जिनका चुनावी राज्यों में प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

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