
सिहोरा। सिहोरा और खितौला को जोडऩे वाले मुख्य रेलवे फाटक के दोनों ओर पसरी बदहाली अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सड़क पर उभरे गहरे, जानलेवा गड्ढे और नुकीले पत्थर यहाँ से गुजरने वाले हर मुसाफिर को मौत का अहसास करा रहे हैं। विडंबना देखिए कि विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है, और यह सड़क नगर पालिका, एमपीआरडीसी तथा रेलवे के आपसी तालमेल की कमी के कारण एक अदद मरम्मत को तरस रही है।
एसी कमरों में अफसर, जनता के वोट लेकर जनप्रतिनिधि गायब
इस बदहाली ने क्षेत्र के सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को जनता की इस जानलेवा मुसीबत से कोई लेना-देना नहीं है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब इस तरफ झांकने तक नहीं आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित दफ्तरों में आराम फरमा रहे हैं। जनता सड़कों पर धूल फांक रही है, घायल हो रही है, लेकिन साहब लोगों की कुर्सी से फाइलों की धूल तक नहीं साफ हो रही।
हर पल मंडरा रहा है काल, बड़ी अनहोनी का इंतजार!
फाटक के दोनों तरफ बिखरे नुकीले पत्थरों के कारण दोपहिया वाहन चालक रोजाना फिसलकर घायल हो रहे हैं। भारी वाहनों के निकलने से उड़ती धूल और उछलते पत्थर राहगीरों के लिए बुलेट की तरह साबित हो रहे हैं। रात के वक्त यहाँ का नजारा और भी खौफनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार प्रशासन और नेता किसी बड़ी मानव हानि या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, तभी शायद इनकी नींद टूटेगी।
फाटक बंद करने की साजिश?
इस पूरे मामले में स्थानीय निवासियों ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा किया है। लोगों का कहना है कि अब तक इस सड़क का निर्माण और मरम्मत मुख्य रूप से रेलवे द्वारा ही की जाती थी। लेकिन पिछले कुछ समय से रेलवे ने यहाँ पूरी तरह हाथ खींच लिए हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की मंशा इस व्यस्त फाटक को हमेशा के लिए बंद करने की है। फाटक बंद करने के अपने इस छिपे हुए एजेंडे के चलते रेलवे जानबूझकर इस सड़क की मरम्मत नहीं करा रहा है। रेलवे की इस हठधर्मिता और लापरवाही के कारण आज हजारों राहगीरों की जिंदगी हर सेकंड दांव पर लगी हुई है।
जनता का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्रीय नागरिकों और व्यापारियों में इस तानाशाही रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपनी मनमानी कर आम जनता को बंधक नहीं बना सकते। यदि विभागों ने अपनी आपसी खींचतान छोड़ तुरंत सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया, तो चक्काजाम और उग्र आंदोलन की शुरुआत होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
तीन विभागों की फुटबॉल बनी सड़क, जनता बेहाल
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