
इंदौर। स्वच्छता सर्वेक्षण की उल्टी गिनती शुरू हो गई और एक-दो दिन में टीमें शहर से लेकर देपालपुर तक का दौरा करेगी। इस बार इंदौर निगम को खुद जहां नम्बर वन का अपना खिताब कायम रखने की चुनौती है, तो साथ में उसे जोड़ीदार देपालपुर को भी स्वच्छता में नम्बर वन लाना पड़ेगा। लिहाजा शहर के साथ-साथ देपालपुर पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। वहीं सिटीजन फीडबैक में 7 लाख तक का आंकड़ा पहुंच गया है। शुरुआत में सिटीजन फीडबैक में इंदौर पीछे था। मगर उसके बाद ताबड़तोड़ एनजीओ सहित अन्य टीमें भी उतारी गईं।
लगातार 8 बार स्वच्छता में नम्बर वन रहने, हालांकि पिछली बार सूरत के साथ नम्बर वन का खिताब साझा भी करना पड़ा। वहीं अन्य शहर भी आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो गए। दूसरी तरफ शहर की जनता यह भी महसूस करती है कि पूर्व की तुलना में शहर की स्वच्छता बेहतर होने की बजाय बिगड़ी है। हालांकि सर्वेक्षण के पूर्व नगर निगम मैदान संभालता है और उसका पूरा अमला शहर के सौंदर्यीकरण से लेकर सफाई व्यवस्था में जुट जाता है। सिटीजन फीडबैक यानी नागरिकों की स्वच्छता को लेकर प्रतिक्रिया ली जाती है, उसका आंकड़ा लगभग 7 लाख तक पहुंच गया और इंदौर सिटीजन फीडबैक में फिलहाल अन्य शहरों की तुलना में नम्बर वन पर कायम है। वहीं जो सर्वेक्षण टीम आएगी वह भी सिटीजन फीडबैक हासिल करेगी। साथ ही शहर के साथ-साथ देपालपुर का भी दौरा होगा।
नगर निगम ने हालांकि देपालपुर नगर परिषद् क्षेत्र को भी स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों के मुताबिक बना लिया है और अभी 4 हजार से अधिक वहां के घरों-दुकानों से रोजाना कचरा एकत्रित किया जा रहा है। स्वच्छ शहर जोड़ी अभियान के अंतर्गत इंदौर नगर निगम द्वारा मेंटर सिटी के रूप में देपालपुर नगर परिषद को स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में निरंतर तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल द्वारा आज देपालपुर नगर परिषद क्षेत्र का निरीक्षण कर आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त प्रखर सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी देपालपुर, इंजीनियर नीरज गुप्ता, श्री शेलेंद्र मिश्रा एवं टीम के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयुक्त श्री सिंघल द्वारा शहर के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया, जिसमें रेजिडेंशियल एवं कमर्शियल स्ट्रेच, ट्रेंचिंग ग्राउंड, स्कूल, गार्डन, कम्युनिटी टॉयलेट, पब्लिक टॉयलेट, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन, स्रोत पर सेग्रीगेशन व्यवस्था, टूरिस्ट एरिया, क्रक्रक्र सेंटर एवं जल स्रोत शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार जिन कार्यों को अभी पूर्ण किया जाना शेष है।
2.2 एकड़ जमीन भी कचरा निपटान कर बना दी उपयोगी
देपालपुर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में भी इंदौर की तर्ज पर काम किया गया और लगभग 1250 मैट्रिक टन लेगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक बायो रैमिडीएशन किया गया, जिसमें 500 से अधिक रैग पीकर्स की सहभागिता रही। इस प्रक्रिया से लगभग 2.2 एकड़ जमीन को पुन: उपयोग योग्य बनाया गया, जो देपालपुर को शून्य लैगेसी वेस्ट शहर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धी प्रदान करता है।
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