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व्यापमं महाघोटाला मामले में STF ने दर्ज की 17 वीं FIR

भोपाल। मध्य प्रदेश (MADHYA PRADESH) के बहुचर्चित व्यापम महाघोटाले (Vayapam Scam) में अब जांच तेज हो गई है. एसटीएफ(STF) ने पेंडिंग शिकायतों की जांच आगे बढ़ाते हुए अब 17वीं FIR दर्ज की है. यह FIR पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 (Police Constable Recruitment Exam 2013) केस में दर्ज की गई.
बीजेपी सरकार में जिस व्यापम घोटाले (Vayapam Scam) की जांच में ब्रेक लग गया था. अब उस जांच को फिर से तेज कर दिया गया है. पेंडिंग व्यापम की शिकायतों पर फिर एफ आई आर होना शुरू हो गई है. कमलनाथ सरकार में 16 FIR दर्ज की गई थीं. अब बीजेपी सरकार में FIR दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया है. बीजेपी सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद अब यह आंकड़ा बढ़कर 17 तक पहुंच गया है.
एसटीएफ ने 17 वीं FIR आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 केस में आरोपी वीरेश कुमार सहित अन्य के खिलाफ धारा 466,468, 471, 120 बी में केस दर्ज किया. आरोपी ने अपनी जगह किसी दूसरे को बैठाकर परीक्षा पास की थी. अभी भी आरोपी पुलिस में नौकरी कर रहा है. STF ने PHQ से आरोपी वीरेश की जानकारी मांगी है. इंदौर STF की टीम इस मामले की जांच कर रही है.

ये है पूरा मामला
व्यापम घोटाले की जांच शिवराज सरकार में सबसे पहले इंदौर क्राइम ब्रांच ने शुरू की थी. 2013 में व्यापम घोटाले में FIR दर्ज होने के बाद सरकार ने एसटीएफ को जांच सौंपी थी. तब एसटीएफ के तत्कालीन अफसरों ने 21 नवंबर 2014 को विज्ञप्ति जारी कर लोगों से नाम या गुमनाम सूचनाएं आमंत्रित की थीं. इसमें 1357 शिकायतें एसटीएफ को मिली थीं, इसमें से 307 शिकायतों की जांच कर 79 FIR दर्ज की गई थीं. 1050 शिकायतों में से 530 जिला पुलिस के पास जांच के लिए भेजी गईं और 197 शिकायतें एसटीएफ के पास थीं. बाकी 323 शिकायतों को नस्तीबद्ध कर दिया, जिसमें गुमनाम होने को आधार बनाया गया था. इन्हीं 197 शिकायतों की जांच STF ने कांग्रेस सरकार में दोबारा शुरू की थी.

CBI ने अपने हाथ में ली जांच
व्यापम की जांच में बीजेपी सरकार पर लग रहे आरोपों के बाद 2015 में एसटीएफ से जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली थी. कमलनाथ सरकार के निर्देश के बाद एसटीएफ ने व्यापम घोटाले की जांच दोबारा शुरू कर 197 पेंडिंग शिकायतों में से 100 को चिह्नित कर लिया था. इन्हीं शिकायतों में से एसटीएफ ने तीन महीने की जांच में 16 FIR दर्ज की थीं. पीएमटी 2008 से 2011 के साथ डीमेट और प्रीपीजी में हुई गड़बड़ियों की शिकायतों पर सबसे पहले FIR दर्ज हुई थी. 84 FIR और दर्ज होनी थीं. इनमें से 100 FIR में करीब 500 लोगों को आरोपी बनाया जाना था. इन चिह्नित शिकायतों की जांच में उस समय की तत्कालीन बीजेपी सरकार के कई मंत्री, आईएएस, आईपीएस अफसरों के साथ बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आए थे. एसटीएफ का सीबीआई की जांच में कोई दखल नहीं था. एसटीएफ की टीम सिर्फ पेंडिंग शिकायतों या फिर आने वाली नई शिकायतों पर जांच कर रही थी.

बीजेपी सरकार में बंद की गयी जांच
बीजेपी की सरकार आते ही एसटीएफ चीफ अशोक अवस्थी और एडिशन एसपी राजेश सिंह भदौरिया को हटा दिया गया. एसटीएफ ने सबसे पहले पुराने एक मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी की और अब फिर से पेंडिंग शिकायतों में FIR दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया है. व्यापम घोटाले की पेंडिंग शिकायतों में आगे भी कई FIR दर्ज होना बाकी हैं. ऐसे में एसटीएफ भी बिना किसी विवाद के पेंडिंग शिकायतों का निराकरण करने में जुट गई है.

 

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