कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नई सरकार बनने के बाद अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कथित अवैध घुसपैठ के मामलों से निपटने के लिए “3-D नीति” लागू करने की घोषणा की है। इस नीति का मतलब है-डिटेक्ट (पहचान), डिलीट (रिकॉर्ड हटाना) और डिपॉर्ट (देश वापसी)।
सरकार की सख्ती के बाद उत्तर 24 परगना जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में ऐसे लोग सीमा के पास पहुंचे, जिनके पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज नहीं बताए जा रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।
राज्य सरकार ने हाल ही में मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में कथित अवैध प्रवासियों को रखने के लिए दो होल्डिंग सेंटर शुरू किए हैं। प्रशासन का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य पहचान और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक लोगों को रखने की व्यवस्था करना है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में कुछ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को इन केंद्रों में रखा गया है। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल देखा गया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कहा कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों के निपटारे में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि पहले भी इस तरह के कानून मौजूद थे, लेकिन उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हुआ। अब प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान होने के बाद पुलिस और Border Security Force के बीच समन्वय के जरिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, पहचान की पुष्टि होने के बाद संबंधित लोगों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जिसमें पूछताछ, फोटोग्राफी और बायोमेट्रिक जानकारी शामिल रहती है। इसके बाद सीमा पार प्रत्यावर्तन के लिए Border Guard Bangladesh से संपर्क किया जाता है।
स्वरूपनगर और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की आवाजाही बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोग निर्माण कार्य, घरेलू कामकाज, होटल और मत्स्य उद्योग से जुड़े थे।
कुछ लोगों ने दावा किया कि वे किसी कानूनी कार्रवाई या हिरासत केंद्र में भेजे जाने के डर से स्वेच्छा से वापस लौट रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
राज्य सरकार की इस कार्रवाई पर विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों की भी नजर बनी हुई है। राजनीतिक हलकों में इसे सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़ा बड़ा मुद्दा माना जा रहा है, जबकि कुछ संगठनों ने प्रक्रिया में मानवाधिकारों और कानूनी अधिकारों के पालन की मांग उठाई है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved