
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को उन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए मंजूरी दे दी है, जिनमें पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर और देश भर में दूसरी जगहों पर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस पर अत्यधिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ के समक्ष पेश किया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने इस मामले का जिक्र किया।
मामले की सुनवाई के लिए पीठ से अनुरोध करते हुए शंकरनारायणन ने कहा कि दोनों याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा उन्हें क्रमांकित किया जा चुका है।
पेपर लीक के विरोध में कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं, जिन्होंने संसद की ओर बढ़ने की। कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा लीक मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
22 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने संसद तक 20 जुलाई को हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई से संबंधित सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड, जिनमें सीसीटीवी कैमरा फुटेज और किसी भी प्रकार की वीडियोग्राफी शामिल है, को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।
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