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समंदर में तनाव! भारत के पास IMEC प्लान, जो BRI को भी देगा कड़ा जवाब

April 15, 2026

नई दिल्ली: दुनिया के बदलते हालात, समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इंडिया-मिडिल ईस्ट यूरोपियन इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) भारत के लिए एक बड़े रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है. अब इसे सिर्फ एक व्यापारिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जा रहा है.

नई दिल्ली स्थित International Centre for Peace Studies की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए एक अवसर है, जिससे वह इस कॉरिडोर को तेजी से लागू कर सकता है. बता दें, IMEC एक मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी कॉरिडोर है, जो समुद्री और रेल मार्गों को जोड़कर भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच तेज और सुरक्षित संपर्क स्थापित करेगा.

इस कॉरिडोर के दो मुख्य हिस्से हैं, जिसमें पूर्वी कॉरिडोर- भारत से समुद्र के रास्ते यूएई तक और पश्चिमी कॉरिडोर- यूएई से रेल नेटवर्क के जरिए सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप तक. इस तरह यह कॉरिडोर समुद्र और रेल का आधुनिक हाइब्रिड नेटवर्क होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के अहम समुद्री रास्ते अब सुरक्षित नहीं रहे हैं. खासकर होर्मुज और अब बाब-अल-मंदेब एक बड़ा जियोपॉलिटिकल फ्लैशपॉइंट बन चुका है. जहां हॉर्मूज से दुनिया का 20 फीसद तेल गुजरता है वहीं और Bab el-Mandeb Strait से दुनियां का करीब 10 फीसद तेल और करीब 20 फीसद इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है.


  • अगर ये संकट और ज्यादा गहराता है, तो जहाजों को अफ्रीका का लंबा रास्ता लेना पड़ता है. जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं और भारत के लिए IMEC बेहद जरूरी हो जाता है. भारत का करीब 95 फीसद व्यापार समुद्र के जरिए होता है. Strait of Hormuz और Bab el-Mandeb जैसे chokepoint पर खतरा भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है.

    IMEC इस समय जैसे हालातों में भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता. क्योंकि ये तेज और किफायती है, इससे यूरोप तक सामान तेजी से पहुंचेगा. लॉजिस्टिक लागत कम होगी और भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा.

    साथ ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई के नए रास्ते बनेंगे. भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा कॉरिडोर की भी संभावना है. इसके अलावा डिजिटल और रणनीतिक बढ़त, जिसमें डेटा केबल, डिजिटल नेटवर्क, सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा. इससे भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी.

    IMEC को चीन की Belt and Road Initiative (BRI) के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. इससे भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी अलग पहचान बनाने का मौका मिलेगा. हाल के समुद्री तनाव के दौरान भारत ने संतुलित नीति अपनाई है, जिसमें भारत ने व्यापार मार्गों को बदला है, अतिरिक्त लागत झेली है और भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई है. भारत ने Operation Prosperity Guardian में शामिल हुए बिना ही अपने हितों की रक्षा की है.

    भारत-यूरोप व्यापार का नया ढांचा बन सकता है. भारत के इसके जरिए वैश्विक झटकों को संभाल सकता है और भविष्य के संकटों में सप्लाई चेन को सुरक्षित रख सकता है. IMEC एक ऐसा सुपर कनेक्टिविटी नेटवर्क है, जहां जहाज और ट्रेन मिलकर भारत से यूरोप तक सामान, ऊर्जा और डेटा को तेज, सुरक्षित और सस्ते तरीके से पहुंचाएंगे.

    आज के दौर में जब समुद्री रास्ते असुरक्षित हो रहे हैं, IMEC भारत के लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन सकता है. अगर इसे तेजी से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में भारत को वैश्विक व्यापार और रणनीति के केंद्र में ला सकता है.

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