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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

मिल एरिया के भाजपा नेता के पुत्र की रिलांचिंग
कई नेता पॉवर में रहते हुए अपने पुत्रों या पुत्रियों को राजनीति में सक्रिय करना चाहते हैं, लेकिन मिल क्षेत्र के एक नेता ने अपने पुत्र की रिलांचिंग की। रिलांचिंग इसलिए कहेंगे कि पहले उनके पुत्र राजनीति में सक्रिय थे। हर जगह आना-जाना था, लेकिन फिर वे व्यवसाय में लग गए। इस बीच उनके दूसरे पुत्र ने राजनीतिक बागडोर संभाल ली। एक बार फिर नेताजी को लगा कि अपने बड़े पुत्र को भी राजनीति में सक्रिय करना चाहिए तो कल अपने क्षेत्र में उन्होंने दिवाली मिलन समारोह रख लिया। नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को बुलाया था और पूरी बागडोर नेता पुत्र के हाथों में थी। नेताजी तो एक ओर अपने साथियों के साथ बैठकर मजमे पर निगरानी रख रहे थे। अच्छी-खासी भीड़ आने के कारण रिलांचिंग सक्सेस भी हो गई और जो चाहिए था, वह भी हो गया। अब देखना है कि ये नेतापुत्र दो नंबर की राजनीति में कितना कमाल दिखा पाते हैं?

गोलू के घर क्यों पहुंचे प्रदेश संगठन मंत्री?
भाजपा के उन नेताओं के पेट में दर्द हो रहा है, जो 1 नंबर से चुनाव लडऩे का ख्वाब देख रहे हैं। पेट दर्द की वजह भी आपको बता दें। गोलू शुक्ला के यहां संगठन के प्रदेश महामंत्री हितानंद शर्मा का जाना। शनिवार को उनके घर पहुंचे हितानंद का शुक्ला परिवार ने स्वागत-सत्कार किया । उनके साथ भाजपा के दूसरे नेता भी थे। गोलू की निगाह 1 और 5 नंबर विधानसभा पर है। जाते-जाते हितानंद शर्मा ने गोलू के कंधे पर हाथ भी रख दिया, जिससे पेटदर्द मरोड़ में बदल गया।

पटवारी को नहीं मिल पा रहा चैन
जीतू पटवारी भारत जोड़ो यात्रा के प्रभारी हैं, लेकिन गुटबाजी के बाद उन्हें शहर में कहीं इंट्री नहीं दी जा रही है। सारी कमान कमलनाथ के सिपाहसालारों के हाथ में है और वे पटवारी के हाथ में कुछ देना नहीं चाहते। बाद में जो सूची आई, उसमें पटवारी को महू का प्रभारी बना दिया गया है, लेकिन पटवारी बेचैन हैं कि शहर में वे जगह नहीं बना पा रहे हैं। कल रविवार को एक बैठक में वे देखे गए और उन्होंने यह बताने में कसर नहीं छोड़ी कि उनके पास यात्रा की कितनी बड़ी जवाबदारी है।
होर्डिंग्स मामले में ठंडे पड़ गए चिंटू चौकसे
चिंटू चौकसे ने जिस तरह से निगम में नेता प्रतिपक्ष का झंडा उठाया था, वह जोश अब उनमें नहीं दिख रहा है। चिंटू ने शुरुआत में ही नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया और कई तरह की घोषणाएं कर डालीं। मीडिया में अपने बयानों से छाने वाले चिंटू ने कांग्रेसी वार्ड में काम नहीं करने पर धरना देने की घोषणा की, लेकिन वे पीछे हट गए। इसके बाद शहर के व्यापारियों से होर्डिंग्स को लेकर नया शुल्क लगाने की बात आई तो उन्होंने मोर्चा खोल दिया और अपनी पार्टी के नेताओं को विश्वास में लेकर पूरे शहर में हस्ताक्षर अभियान चलाया। कहा गया कि वसूली हुई तो पूरे शहर में आंदोलन करूंगा, लेकिन ये अभियान भी ठंडा पड़ गया है। हालांकि चिंटू के लोग कह रहे हैं कि भैया अभी राहुल गांधी की यात्रा में व्यस्त हैं और यात्रा निपटने के बाद फिर नेता प्रतिपक्ष के रूप में सक्रिय हो जाएंगे।
वास्तु से डरे चावड़ा
राजनेता भी वास्तु मानते हैं, ज्योतिष की बात सुनते हैं। मुहूर्त के हिसाब से काम करते हैं, ताकि कोई गड़बड़ न हो जाए। ऐसा ही कुछ आईडीए अध्यक्ष जयपालसिंह चावड़ा भी करते हैं। संगठन मंत्री से राजनीति में प्रवेश करने वाले चावड़ा के लिए नया बंगला तो तैयार हो गया, जो कभी कांग्रेस के महेश जोशी के पास हुआ करता था, लेकिन कहा जा रहा है कि चावड़ा अब इस बंगले में नहीं जाना चाहते। कारण बंगले का वास्तु ठीक नहीं है। आईडीए बिल्डिंग से खबरें आ रही हैं कि चावड़ा किसी नए बंगले की तलाश में हैं। अब पुराने बंगले में कौन जाएगा, ये अभी तो तय नहीं है।
चिट्ठी के बाद इंट्री
चाहते हुए भी निगम में भाजपा की एमआईसी खुलकर काम नहीं कर पा रही है। उन्हें हर काम के लिए अधिकारियों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। ढाई साल में अधिकारी भी कुछ ज्यादा ही समझदार या कहे कि चतुर हो गए हैं। खैर बात चि_ी की है और एमआइसी सदस्यों को अगर निगम कमिश्नर से मिलना है तो बाकायदा चि_ी दी जाती है कि फलाने को मिलना है। पार्षद तो इस मामले में और परेशान हैं। उन्हें तो कई बार अधिकारियों के कार्यालय के बाहर बैठकर इंतजार करना पड़ता है कि साहब अंदर कब बुला रहे हैं। कुछ महिला पार्षद तो ऐसी हैं, जो अपनी बात भी अधिकारियों के सामने ठीक से नहीं रख पा रही हैं।

बीच बाजार में पार्षद पति का हंगामा
एक पार्षद पति के कारनामे इन दिनों चर्चा में बने रहते हैं। अपने आपको संघ से जुड़ा होने और पत्नी के पार्षद बन जाने के बाद उनका पारा इन दिनों चढ़ा रहता है। वे किसी को कुछ नहीं समझते। हालांकि उनकी मां पार्टी में सक्रिय थीं, लेकिन उम्र के आधार पर उन्हें टिकट नहीं देकर बहू को दे दिया। बेटा पिछले दिनों उस समय चर्चा में आया, जब पटेल ब्रिज के नीचे एक खाने-पीने के ठीये पर बवाल मचा। दीनदयाल भवन तक ये बात पहुंचने के पहले ही दबा दी गई है, लेकिन भाइयों ने अपना काम कर दिया है और यह भी बताया जा रहा है कि भैया ने किसी वर्ग विशेष के व्यक्ति को बीच बाजार में दुकान खुलवाकर आर्थिक लाभ लिया है। कहने वाले कह रहे हैं कि इनके पास चुनाव लडऩे के लिए फंड तक नहीं था और चार महीनों में ही इनके रंग-ढंग बदले-बदले नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के शहर अध्यक्ष की इन दिनों अपने ही एक विधायक से पटरी नहीं बैठने की बात गांधी भवन में तेजी से चल रही है। कारण क्या है, यह खोजने में कांग्रेसी लगे हुए हैं। -संजीव मालवीय

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