भोपाल

प्रदेश के जंगलों में औषधियों का खजाना आदिवासियों की सुधरेगी आर्थिक सेहत

  • सीएम ने कहा- कोरोना काल में दुनिया का आयुर्वेद पर भरोसा बढ़ा

भोपाल। प्रदेश के जंगलों में जहां औषधियों का अमूल्य खजाना है, वही जनजातीय भाई-बहन इनका महत्व एवं उपयोग समझते हैं। हमें एक ओर हमारे औषधियों के इस खजाने को संरक्षित एवं संवर्धित करना है, वहीं जनजातीय वर्ग के इस पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाकर लोगों को स्वास्थ्य लाभ देना है। अधिक से अधिक लोगों को आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ मिल सके तथा प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले हमारे भाई-बहनों को रोजगार एवं आजीविका मिल सके, इसके उद्देश्य से ‘देवारण्य’ योजना बनाई गई है। इस योजना का तीव्र गति से क्रियान्वयन किया जाएगा।
आयुष विभाग द्वारा तैयार की गई देवारण्य योजना की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि योग और आयुर्वेद के लिए भारत दुनियाभर में जाना जाता है। आयुर्वेद देश एवं दुनिया के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। कोविड काल में प्रदेश में बड़ी संख्या में योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से लोगों ने स्वास्थ्य लाभ लिया।

भोपाल में बने ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडीशनल मेडिसिन्स
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत में ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडीशनल मेडिसिन्स बनाने जा रहा है। ऐसे प्रयास किए जाएंगे कि यह मध्यप्रदेश में बने। भोपाल में खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल अद्भुत कार्य कर रहा है।

आंवले की अत्यधिक मांग
डाबर इंडिया के सी.ई.ओ. मोहित मल्होत्रा ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों के लिए आंवले की अत्यधिक मांग है। मध्यप्रदेश से बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति होती है। औषधीय फसलों को बढ़ावा दिए जाने के साथ यदि इन फसलों का जैविक प्रमाणीकरण करा लिया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी होगा।

आयुष औषधियों के उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में देवारण्य योजना के माध्यम से आयुष औषधियों के उत्पादन की एक पूरी वैल्यू चेन का विकास करेंगे। इस कार्य में स्व-सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसमें कृषि उत्पादक संगठन, आयुष विभाग, वन, ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, पर्यटन, कृषि, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन एवं जनजातीय कार्य विभाग मिलकर मिशन मोड में कार्य करेंगे।

नाड़ी देखकर बीमारी जान लेते हैं वैद्य
मुख्यमंत्री ने अपने गाँव के वैद्य रघुवीर प्रसाद का उल्लेख करते हुए कहा कि वे नाड़ी देखकर रोग जान लेते थे और दवा देते थे। हमें अपने पारम्परिक ज्ञान को आगे बढ़ाना होगा। मध्यप्रदेश में वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गाँवों की सुंदर वादियों में औषधीय पौधों की खेती की जाए। आयुष एवं पर्यटन को साथ-साथ लाया जाएगा।

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