वॉशिंगटन। अमेरिका में रूसी तेल (Russian oil) खरीद पर दी गई छूट को लेकर सियासत तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के फैसले पर विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे “180 डिग्री यू-टर्न” करार दिया है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी कर रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर लगी पाबंदी में राहत की अवधि 16 मई तक बढ़ा दी है। इससे पहले यह छूट 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी थी। नए फैसले के तहत 17 अप्रैल तक लोड हुआ रूसी तेल अब तय समयसीमा तक खरीदा जा सकेगा।
डेमोक्रेट नेताओं जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने संयुक्त बयान जारी कर ‘रूस जनरल लाइसेंस 134’ को दोबारा लागू करने की आलोचना की। उनका कहना है कि यूक्रेन पर हमले जारी रहने के बीच रूस को आर्थिक फायदा पहुंचाना गलत संदेश देता है।
दिलचस्प बात यह है कि स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को कहा था कि रूस-ईरान के तेल पर पाबंदी में और ढील नहीं दी जाएगी। लेकिन कुछ ही दिनों में सरकार ने अपना रुख बदल लिया, जिससे विपक्ष को हमला करने का मौका मिल गया।
ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान टला है।
इस फैसले का फायदा भारत जैसे उन देशों को मिलेगा, जो ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
इस बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता जारी रखते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द समझौता हो सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि अगले दौर की वार्ता की तैयारी चल रही है।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों की समीक्षा की पुष्टि की है, लेकिन उसके विवरण साझा नहीं किए हैं।
कुल मिलाकर, रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट ने अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर वैश्विक ऊर्जा संतुलन का तर्क दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे रूस को अप्रत्यक्ष समर्थन माना जा रहा है।
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