तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव (Ongoing Tensions in West Asia) के बीच एक नई रिपोर्ट ने खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और युद्ध समीकरणों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान (Iran) के साथ छिड़े संघर्ष में अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कथित भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। दावा किया गया है कि हालिया युद्ध के दौरान यूएई ने गुप्त रूप से ईरान के एक अहम तेल ठिकाने पर हमला किया था।
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई ने पिछले महीने ईरान के लवन द्वीप स्थित एक बड़े तेल रिफाइनरी परिसर को निशाना बनाया। यह हमला उस समय हुआ बताया जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump संघर्ष विराम की घोषणा करने की तैयारी में थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लवन द्वीप पर स्थित यह रिफाइनरी ईरान के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों में शामिल है और यहां से प्रतिदिन लगभग 60 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इस खुलासे के बाद खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
8 अप्रैल को हुआ था कथित हमला
जानकारी के अनुसार, हमला 8 अप्रैल की सुबह हुआ था। ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) ने उस समय तेल ठिकानों पर “कायराना हमला” होने की पुष्टि की थी, हालांकि किसी देश का नाम नहीं लिया गया था।
हमले के कुछ घंटों बाद ईरान ने यूएई और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे थे। यूएई का दावा था कि उस पर 17 मिसाइलों और 35 ड्रोनों से हमला किया गया। उस समय इन घटनाओं को जवाबी सैन्य कार्रवाई माना गया था, लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
खाड़ी देशों की भूमिका पर उठे सवाल
अब तक माना जा रहा था कि यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देश सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल नहीं हैं और वे युद्ध को लंबा खींचने से बचना चाहते हैं। हालांकि इस नई रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि पर्दे के पीछे कुछ देशों की सक्रिय भूमिका हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट सही साबित होती है, तो इससे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान पहले ही इन देशों पर अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने के आरोप लगाता रहा है।
अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
रिपोर्ट सामने आने के बाद फिलहाल United Arab Emirates, Iran या अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इस खुलासे ने पश्चिम एशिया में एक नए सैन्य और कूटनीतिक संकट की आशंका बढ़ा दी है।
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