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अविवाहित लोगों में हार्ट फेलियर से मौत का ज्यादा खतरा, शोध में खुलासा

नई दिल्‍ली। शादी न सिर्फ एक सामाजिक व्यवस्था (social system) यानी सिर्फ एक सोशल सिस्टम ही नही है, बल्कि इसका असर हेल्थ पर भी पड़ता है. साइंटिफिक कॉन्ग्रेस ऑफ द यूरोपीयन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ESC) की रिसर्च में पाया गया है कि अनमैरिड यानी अविवाहित (Single) या जिनके लाइफ पार्टनर नहीं होते हैं, उन लोगों को हार्ट फेलियर की स्थिति में मौत का खतरा (danger of death) ज्यादा होता है. इस स्टडी के अनुसार, हार्ट फेलियर की स्थिति को झेलने वाले अनमैरिड लोगों के सामाजिक संबंध सीमित होने से, उनमें अपनी हालत को संभालने का आत्मविश्वास मैरिड लोगों से कम होता है. इस अंतर की वजह से अनमैरिड लोगों में हार्ट फेलियर (heart failure) के बाद लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना अपेक्षाकृत कम हो जाती है.

स्टडी के ऑथर और जर्मनी (Germany) के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल वुर्जबर्ग में कॉम्प्रिहेंसिव हार्ट फेलियर सेंटर के डॉ. फैबियन केरवेगन (Dr. Fabian Kerwagen)का कहना है कि सोशल सपोर्ट से लोगों को लॉन्ग टर्म सिचुएशन्स को मैनेज करने में मदद मिलती है. लाइफ पार्टनर से आपको दवा लेने में मदद मिल सकती है या वे उसके लिए तत्परता दिखा सकते हैं. उससे मरीजों को हेल्दी बिहेवियर विकसित करने में आसानी हो जाती है. ये सभी कारक लंबी उम्र के लिए पॉजिटिव इफैक्ट्स डालते हैं.

क्या कहते हैं जानकार
डॉ फैबियन के अनुसार, इस स्टडी में शामिल अनमैरिड मरीजों में मैरिड मरीजों की तुलना में सोशल रिलेशनशिप की कमी देखी गई. इसके साथ ही हार्ट फेलियर से उत्पन्न स्थिति को संभालने का आत्मविश्वास भी कम पाया गया. हमने इन बातों के मद्देनजर इसकी पड़ताल की कि क्या ये कारक लाइफ स्पान यानी जीवनकाल से भी जुड़ो हो सकते हैं.



कैसे हुई स्टडी
इससे पहले की स्टडीज देखा गया कि अनमैरिड लोगों में रोगों के निदान (Diagnosis of Diseases) के प्रति कम सजगता होती है. चाहे ये आम लोग हों या फिर धमनी और हार्ट रोगी, दोनों में ही ये स्थिति दिखी है. इस विश्लेषण को एक्सटेंडेड इंटरडिसिप्लिनरी नेटवर्क हार्ट फेलियर (E-INH) के साथ जोड़कर, मैरिटल स्टेटस (वैवाहिक स्थिति) के क्रॉनिक हार्ट फेलियर के मामले में प्रभाव का आकलन किया गया. ई-आईएनएच स्टडी में 2004 से 2007 के बीच हार्ट फेलियर के कारण अस्पताल में भर्ती 1022 रोगियों को शामिल किया गया. इनमें से 1008 रोगियों ने मैरिटल स्टेटस की जानकारी दी, जिनमें से 633 यानी करीब 67% मैरिड थे और 375 यानी करीब 37% अनमैरिड. अनमैरिड लोगों की कैटेगरी में विधवा या विधुर (195), कभी शादी नहीं करने वाले (96) और तलाकशुदा (84) को शामिल किया गया.

हार्ट फेलियर वाले रोगियों के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए कार्डियोमायोपैथी प्रश्नावली के जरिए उनके क्वालिटी ऑफ लाइफ, सोशल रिलेशनशिप की सीमा और सक्षमता का आकलन किया गया. यहां सोशल रिलेशनशिप का संदर्भ हार्ट फेलियर के लक्षणों के कारण आसपास के लोगों से संपर्क की क्षमता जैसे – अपने पसंदीदा काम करने, मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने और रिश्तेदारों या दोस्तों के घर पर से जाने से है. आत्म क्षमता का मतलब हार्ट फेलियर को रोकने और उसकी जटिलताओं को कम करने के उपाय करना है. इसके साथ ही अवसाद ग्रस्त मूड का आकलन पेशेंट हेल्थ क्वेश्चनेर (PHQ-9) से किया गया.

स्टडी की शुरुआत में प्रतिभागियों की स्थिति
विश्लेषण में पाया गया कि मैरिड और अनमैरिड मरीजों में कुल मिलाकर क्वालिटी ऑफ लाइफ या डिप्रेस्ड मूड में कोई खास अंतर नहीं था. लेकिन अनमैरिड लोगों के सामाजिक संबंधों की सीमा (सोशल लिमिटेशन) और आत्मशक्ति या प्रभाव (सेल्फ एफिकैसी) का स्कोर मैरिड लोगों की तुलना में काफी खराब था.

10 साल बाद की स्थिति
10 साल की फॉलोअप स्टडी में पाया गया कि 679 (67%) रोगियों की मौत हो गई. मैरिड और अनमैरिड की स्थिति की तुलना करने पर पाया गया, कि सभी मानकों पर अनमैरिड लोग कमजोर साबित हुए और उनकी मौत का दर भी ज्यादा रहा. डॉक्टर फैबियन केरवेगन का कहना है कि इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि हार्ट फेलियर वाले मरीजों की लंबी आयु में शादी और सामाजिक संबंधों का सहयोग अपेक्षित है.

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