पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव (Bihar Legislative Council Election) के लिए एनडीए (NDA) उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश (puck light) को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। 9 सीटों के लिए घोषित उम्मीदवारों में दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं होने से उनके मंत्री पद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
दरअसल, दीपक प्रकाश फिलहाल न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद सदस्य। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। ऐसे में एमएलसी चुनाव में नाम न आने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर उपेंद्र कुशवाहा ने संकेत दिया है कि तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “अभी नामांकन खत्म होने में दो दिन बाकी हैं, थोड़ा इंतजार कीजिए।” उन्होंने यह भी बताया कि वह एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं और लगातार बातचीत चल रही है।
बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव होना है। एनडीए ने अब तक कुल 9 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें चार-चार उम्मीदवार भाजपा और जदयू के हैं, जबकि एक प्रत्याशी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उतारा है।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार विधानसभा में संख्या बल के आधार पर 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट विपक्षी महागठबंधन के खाते में जा सकती है। 8 जून नामांकन की अंतिम तारीख है, जबकि 18 जून को मतदान होना है।
चर्चा यह भी है कि यदि दीपक प्रकाश को किसी सीट से उम्मीदवार बनाया भी जाता है, तो राजनीतिक गणित उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्योंकि रालोमो के पास विधानसभा में सीमित संख्या बल है और जीत के लिए सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
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