img-fluid

इंदौर-खंडवा रेल लाइन का इंतजार फिर बढ़ा, अब 2030 तक पूरा होने के आसार

July 04, 2026

सबसे चुनौतीपूर्ण सेक्शन के लिए 1,112 करोड़ का टेंडर जारी, निर्माण में लगेंगे 42 महीने

इंदौर। मालवा और निमाड़ (Malwa and Nimar) को सीधे जोडऩे वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर-खंडवा (Indore-Khandwa) ब्रॉडगेज रेल परियोजना (Broad-gauge rail project) का इंतजार एक बार फिर लंबा हो गया है। पश्चिम रेलवे ने परियोजना के सबसे कठिन और बचे हुए हिस्से के निर्माण के लिए 1,112 करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर जारी किया है। टेंडर में निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 42 महीने की समयसीमा तय की गई है। ऐसे में यदि काम तय समय पर भी पूरा होता है तो पूरी परियोजना के वर्ष 2030 से पहले शुरू होने की संभावना काफी कम हो गई है।

रेलवे द्वारा जारी टेंडर कुल्थाना से राजपुरा के बीच करीब 13 किलोमीटर लंबे सेक्शन के लिए है। इस हिस्से में नई ब्रॉडगेज लाइन बिछाने के साथ स्टेशन भवन, सात सुरंगें, सात बड़े पुल, तीन मेगा ब्रिज और अन्य रेल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। यह पूरा सेक्शन पहाड़ी और वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए इसे परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण भाग माना जाता है। करीब दो दशक पहले शुरू हुई इंदौर-खंडवा रेल लाइन परियोजना पश्चिम रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने पर इंदौर से खंडवा के बीच सीधा ब्रॉडगेज रेल संपर्क स्थापित होगा। साथ ही मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए रेल मार्ग छोटा होगा और मालवा-निमाड़ के बीच व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। क्षेत्र के लोग वर्षों से इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समयसीमा लगातार आगे बढऩे से उनकी उम्मीदों को बार-बार झटका लग रहा है।


  • बार-बार बढ़ती रही प्रोजेक्ट की समयसीमा
    महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद थी कि रेल लाइन कुछ वर्षों में शुरू हो जाएगी, लेकिन निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पाया। कई बार नई समयसीमा घोषित हुई, मगर परियोजना अब भी अधूरी है। नए टेंडर के बाद अब 2030 तक इसके पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए अहम परियोजना
    इंदौर-खंडवा रेल लाइन शुरू होने से मालवा और निमाड़ के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। इंदौर से खंडवा और आगे मुंबई की यात्रा अधिक सुगम बनेगी। कृषि उपज, औद्योगिक सामान और अन्य माल परिवहन की लागत व समय कम होने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि इस परियोजना को पश्चिम रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में गिना जाता है।

    सबसे कठिन 13 किलोमीटर
    इंदौर-खंडवा परियोजना में कुल्थाना से राजपुरा के बीच का 13 किलोमीटर हिस्सा सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसी सेक्शन में सात सुरंगें, सात बड़े पुल और तीन मेगा ब्रिज बनाए जाना हैं। पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण इस हिस्से के निर्माण में ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

    Share:

  • जहां भगवान को चढ़ती है मदिरा, जानिए उज्जैन के काल भैरव मंदिर की सदियों पुरानी अनूठी परंपरा

    Sat Jul 4 , 2026
    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) के कानपुर जिले(Kanpur district) में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple)वर्षों से एक ऐसी अनोखी मान्यता के कारण लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मानसून आने से लगभग सात दिन पहले मंदिर की छत के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved