
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाों में होने वाली धांधली और पर्चा लीक की कई घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटकाया है. हाल ही में नीट परीक्षा लीक का मामला सामने आया था, जिसको लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का उग्र आंदोलन कई दिनों तक चला. आखिरकार वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया. देश भर में भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता बनाए रखने और नकल माफिया की कमर तोड़ने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक को लेकर बेहद सख्त कानून बने हैं. चलिए जानें कि किस राज्य में इसके लिए कितनी सजा है.
उत्तराखंड
देवभूमि उत्तराखंड में रवरी 2023 में लागू किए गए प्रतिस्पर्धी परीक्षा कानून को देश का सबसे कठोर कानून माना जाता है. इस कानून के तहत भर्ती परीक्षाओं में पर्चा लीक करने वाले सिंडिकेट और माफिया को सीधे आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है. इसके साथ ही दोषियों पर 10 करोड़ रुपये तक भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता है. परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले उम्मीदवारों को 3 साल की जेल, 5 लाख रुपये का जुर्माना और आने वाली 2 से 5 साल के लिए सभी प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया जाता है.
झारखंड
झारखंड सरकार ने भी नवंबर 2023 में अपना एंटी पेपर लीक कानून लागू किया था. इस कानून में परीक्षा में धांधली करने वाले और पर्चा लीक में शामिल अपराधियों के लिए उम्रकैद की सजा को शामिल किया गया है. इसके साथ-साथ 10 करोड़ रुपये तक का कड़ा आर्थिक दंड भी जोड़ा गया है. अगर कोई छात्र या उम्मीदवार अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे 7 साल तक की जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है और 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भी शामिल है.
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में जुलाई 2024 में नए सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम को मंजूरी दी गई है, जो नकल माफियाओं पर सीधे नकेस कसता है. इस कानून के अंतर्गत परीक्षा लीक करने के आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है. इसके अतिरिक्त दोषियों की अवैध संपत्ति को जब्त करने और उन पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने की स्पष्ट व्यवस्था है. अनुचित तरीकों का सहारा लेने वाले उम्मीदवारों को स्थिति की गंभीरता के आधार पर 2 साल उम्रकैद की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माने का सामना करना पड़ता है.
ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार के नियम
ओडिशा में फरवरी 2025 में लागू किए गए नए कानून के तहत पर्चा ली करने वाले गिरोहों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है. अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 10 साल की जेल और 10 लाख का जुर्माना तय है. छत्तीसगढ़ में मार्च 2026 से प्रभावी कानून में 10 साल की कैद, 1 करोड़ का जुर्माना और अपराधियों की जब्ती का नियम है. वहीं बिहार में अगस्त 2024 से लागू कानून के तहत 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने और अनुचित साधन पर 3 से 5 लाख की सजा और 10 लाख का दंड निर्धारित है.
राजस्थान और गुजरात
राजस्थान सरकार ने अप्रैल 2022 में एंटी पेपर लीक एक्ट लागू किया था, जिसमें 5 से 10 साल तक की कैद और 10 लाख से 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने की व्यवस्था है. अनुचित साधनों पर 3 साल जेल और न्यूनतम 1 लाख का जुर्माना लगाया जाता है. गुजरात में मार्च 2023 से लागू कानून में 7 से 10 साल की सजा और कम के कम 1 करोड़ का जुर्माना तय किया गया है. दोनों ही राज्यों में परीक्षा की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है.
हरियाणा, हिमाचल व अन्य राज्य
हरियाणा में सितंबर 2021 से प्रभावी कानून के तहत 7 से 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माने का नियम है. हिमाचल प्रदेश में नवंबर 2025 से लागू कानून के अंतर्गत 3 से 10 साल कैद और 1 करोड़ रुपये तक का दंड दिया जाता है. असम में मार्च 2024 से 5 से 10 साल की जेल और 10 लाख से 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है. वहीं महाराष्ट्र में जुलाई 2024 से और अरुणाचल प्रदेश में अगस्त 2024 से लागू कानूनों के तहत 5 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है. अंत में, आंध्र प्रदेश में 1997 के पुराने कानून के तहत 3 से 7 साल जेल और 5,000 से 1 लाख रुपये जुर्माने की व्यवस्था है.
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