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हिंदुजा परिवार के सदस्यों को जेल जाने की नौबत क्यों आई?


नई दिल्ली। इंडसइंड बैंक (Indusind Bank) और अशोक लीलैंड (Ashok Leyland) जैसे नामी ब्रांड्स का स्वामित्व रखने वाला हिंदुजा परिवार (Hinduja Family) एक बार फिर नाराकात्मक खबरों के कारण चर्चा में हैं। ब्रिटेन (Britain) के सबसे धनी (rich) परिवार हिंदुजा बंधुओं के परिवार के कुछ सदस्यों को अपने जिनेवा विला में भारतीय कर्मचारियों का शोषण करने के लिए स्विटजरलैंड में लगभग चार साल की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। स्विस न्यायाधीश ने परिवार के चार सदस्यों को अवैध रूप से लोगों को काम पर रखने का दोषी पाया है। परिवार ने अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी है।


अभियोजकों ने आरोप लगाया कि हिंदुजा बंधुओं ने अपने कर्मचारियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया। इन कर्मचारियों को भारत से जिनेवा स्थित पारिवारिक विला में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने के लिए ले जाया गया था। जहां उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए मामूली वेतन के एवज में रोजना 17 से 18 घंटे काम करवाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार के सदस्यों ने अपने पालतू कुत्तों पर साल में जितना खर्च किया उससे भी कम अपने पैसे अपने घरेलू सहायकों को दिए। अब इस मामले में अदालत ने हिंदुजा बंधुओं को ‘स्वार्थी’ करार दिया। अदालत ने प्रकाश हिंदुजा और उनकी पत्नी कमल हिंदुजा को चार-चार साल और छह महीने जेल की सजा सुनाई जबकि उनके बेटे अजय और नम्रता को चार-चार साल की सजा सुनाई। हालांकि, अदालत ने उन्हें मानव तस्करी के अधिक गंभीर आरोप से बरी कर दिया।

हिंदुजा परिवार के पास कुल कितनी संपत्ति है? अदालत में क्यों हुई फजीहत?
हिंदुजा परिवार की कुल संपत्ति करीब 20 अरब डॉलर है और वे 38 देशों में तेल एवं गैस से लेकर बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा तक के कारोबार चलाते हैं। फोर्ब्स के अनुसार पिछले साल परिवार सबसे अमीर भारतीयों की सूची में सातवें नंबर पर था। मुकदमे के दौरान अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि पर्याप्त संपत्ति होने के बावजूद हिंदुजा बंधुओं ने अपने कर्मचारियों को एक दिन में 18 घंटे तक काम करने के लिए केवल 8 डॉलर (660 रुपये) का भुगतान किया। यह राशि स्विस कानून द्वारा अनिवार्य वेतन के दसवें हिस्से से भी कम था।

क्या परिवार के सदस्य कर्मचारियों से अधिक कुत्तों पर खर्च करते थे?
अभियोजकों ने आरोप लगाया कि था परिवार ने अपने कर्मचारियों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए थे और विला के बाहर निकलने की अनुमति भी शायद ही कभी दी गई। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि परिवार ने अपने नौकरों की तुलना में अपने कुत्ते पर अधिक खर्च किया। स्विस अभियोजक यवेस बर्टोसा ने कहा था कि उनका खर्च हर साल अपने कुत्ते पर लगभग 8,584 स्विस फ्रैंक (8 लाख रुपये) था, जबकि उनके कुछ कर्मचारी प्रति दिन केवल 7 स्विस फ्रैंक (660 रुपये) के लिए सप्ताह के सातों दिन 18 घंटे तक काम करते थे।

हिंदुजा परिवार के सदस्यों ने अपने बचाव में क्या कहा?
हिंदुजा बंधुओं ने आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि उनके कर्मचारी स्वतंत्र रूप से विला छोड़ सकते हैं और उन्हें पर्याप्त लाभ दिया जा सकता है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कर्मचारी “उन्हें बेहतर जीवन की पेशकश” देने के लिए हिंदुजा के प्रति “आभारी” रहे हैं। परिवार ने एक बयान में कहा कि वे फैसले से ‘स्तब्ध’ हैं और उन्होंने ऊपरी अदालत में चुनौती दी है। हिंदुजा बंधुओं के वकीलों द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है, “हम इस अदालत में किए गए बाकी फैसलों से चकित और निराश हैं, और हमने निश्चित रूप से ऊपरी अदालत में अपील दायर की है, जिससे निर्णय का यह हिस्सा प्रभावी नहीं हो गया है।

क्या सजा सुनाए जाने के दौरान परिवार के सदस्य अदालत में मौजूद थे?
हिंदुजा बंधुओं ने पहले अपने खिलाफ आरोप लगाने वाले तीन कर्मचारियों के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया था, लेकिन आरोपों की गंभीरता के कारण अभियोजन पक्ष ने इसे आगे बढ़ाया। प्रकाश और कमल हिंदुजा स्वास्थ्य कारणों से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। अजय और नम्रता सुनवाई में शामिल हुए थे लेकिन फैसला सुनाने के लिए शुक्रवार को मौजूद नहीं थे।

क्या पहले भी विवादों में रहा है हिंदुजा परिवार?
हिंदुजा परिवार संपत्ति बंटवारे के लिए पहले भी विवादों में रहा है। यह विवादों सालों चला। दरअसल, 2014 में हिंदुजा समूह के संस्थापक दीपचंद हिंदुजा के चार बेटों श्रीचंद, गोपीचंद, प्रकाश और अशोक के बीच एक समझौता हुआ। इसमें कहा गया था कि एक भाई के नाम पर रखी गई सम्पत्ति एक की नहीं बल्कि चार भाइयों की होगी। यही समझौता विवाद की जड़ बना। समझौते के करीब एक साल बाद हिंदुजा भाइयों में सबसे बड़े श्रीचंद हिंदुजा ने हिंदुजा बैंक ऑफ स्विटजरलैंड पर अकेले स्वामित्व का दावा किया। इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अपने तीनों अन्य भाइयों पर केस कर दिया। याचिका में कहा गया 2014 में हुआ समझौता कानूनी तौर पर वैध नहीं था। यह विवादों सालों तक चलने के बाद परिवार ने समझौता कर लिया। परिवार के सबसे बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा की 17 मई 2023 को निधन हो चुका है।

हिंदूजा समूह का 110 साल का इतिहास कैसा रहा है?
हिंदुजा समूह की शुरुआत अविभाजित भारत सिंध प्रांत के शिकारपुर जिले में जन्मे दीपचंद हिंदुजा ने की थी। 1914 में दीपचंद ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की यात्रा की और वहां व्यापार के गुर सिखे। बाद में सिंध आकर उन्होंने ने अपने व्यापार की शुरुआत की। 1919 में दीपचंद ने अपने व्यापार का विस्तार किया और ईरान में पहला अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय खोला। 1979 तक यह समूह ईरान से चलता रहा। 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद समूह ने अपना हेडक्वार्टर लंदन स्थानांतरित कर दिया। अभी भी इस समूह का केंद्र ब्रिटेन में ही है। दीपचंद हिंदुजा द्वारा शुरू इस समूह को उनके बेटों श्रीचंद हिंदुजा, गोपीचंद, प्रकाश और अशोक हिंदुजा ने आगे बढ़ाया।

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