
नई दिल्ली । कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Congress General Secretary Jairam Ramesh) ने कहा कि पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत खारिज होने के फैसले (Decision of rejecting Pawan Kheda’s Anticipatory Bail) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे (Will challenge in Supreme Court) ।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा कांग्रेस नेता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पार्टी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर कई पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद रिनिकी ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत दायर की थी, जो 24 अप्रैल को खारिज हो गई थी।
कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए लिखा है, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ पूरी तरह एकजुटता से खड़ी है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है। हमें विश्वास है कि धमकी, डरा-धमकाकर और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की विजय होगी।” गौरतलब है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों के बाद 21 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान, खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और मुख्यमंत्री के कथित बयानों से उपजा है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले के आसपास का माहौल निष्पक्षता को लेकर चिंताएं पैदा करता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। सिंघवी ने कहा कि खेड़ा के भागने का कोई खतरा नहीं है और हिरासत में पूछताछ अनावश्यक है। उन्होंने गिरफ्तारी की आवश्यकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरोप अधिक से अधिक आपराधिक मानहानि के दायरे में आ सकते हैं।
वरिष्ठ वकील कमल नयन चौधरी ने भी इन्हीं तर्कों का समर्थन करते हुए आरोपों को “अपमानजनक” बताया और कहा कि ये आरोप “जानबूझकर दुर्भावना” से गढ़े गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपों की प्रकृति गंभीर दंड प्रावधानों को लागू करने का औचित्य नहीं देती और इनका समाधान निजी शिकायत के माध्यम से किया जा सकता है। इस याचिका का विरोध करते हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने तर्क दिया कि मामला मानहानि से कहीं अधिक गंभीर है। इस मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, जिनमें दस्तावेजों और स्वामित्व विलेखों की कथित हेराफेरी भी शामिल है, जिसके लिए हिरासत में जांच आवश्यक है।
इस मामले की प्रक्रियात्मक पृष्ठभूमि जटिल है। इससे पहले, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी, जिससे उन्हें उचित न्यायालय में जाने की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, असम पुलिस द्वारा इस आदेश को चुनौती देने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल को इस राहत पर रोक लगा दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने खेड़ा की रोक हटाने की याचिका खारिज कर दी और अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने से भी इनकार कर दिया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved