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नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी से खत्म होगी हिंसा? जानिए सर्वे के मुताबिक भारतीयों की राय

नई दिल्ली। नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की पैगंबर मुहम्मद के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी (Offensive comment) से पैदा हुए विवाद के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादियों (Radical Islamists) से उनको और उनके समर्थकों को हिंसा और मौत की धमकियों का दौर जारी है। ताजा मामला है सलमान चिश्ती, अजमेर दरगाह के हिस्ट्रीशीटर खादिम की ओर से निलंबित भाजपा प्रवक्ता को जारी की गई धमकी का। वीडियो संदेश में, चिश्ती नूपुर शर्मा का सिर काटने वाले को अपना घर उपहार के रूप में देने का वादा करता है। सलमान चिश्ती की ओर से यह धमकी कन्हैया लाल और उमेश प्रहलादराव कोल्हे की उदयपुर और अमरावती में नृशंस हत्याओं के बाद आई है।

नूपुर की गिरफ्तारी से खत्म होगा धमकियों का दौर? जबरदस्त बंटी राय
सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, जहां 49 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि भाजपा नेता की गिरफ्तारी से हिंसा और धमकियां खत्म हो जाएंगी, वहीं 51 फीसदी इस भावना से असहमत हैं। जाहिर है, इस मुद्दे पर एनडीए और विपक्षी मतदाताओं के विचारों में राजनीतिक ध्रुवीकरण स्पष्ट था। सर्वे के दौरान जहां 62 फीसदी विपक्षी समर्थकों ने कहा कि नूपुर शर्मा को जेल में डालने से हिंसा और धमकियां खत्म हो जाएंगी, वहीं एनडीए के 65 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

75% सवर्ण और 60% OBC का मानना, गिरफ्तारी से खत्म नहीं होगी हिंसा
सर्वे के दौरान इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक समूहों के विचार बंटे हुए थे। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, जबकि अधिकांश उच्च जाति हिंदुओं (यूसीएच) – 75 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) – 60 प्रतिशत ने कहा कि नूपुर शर्मा को हिरासत में लेने से हिंसा और धमकियां समाप्त नहीं होंगी। अधिकांश मुस्लिम – 81 फीसदी ने पूरी तरह से अलग विचार व्यक्त किए। वहीं, इस मुद्दे पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की राय बंटी हुई थी। सर्वेक्षण के दौरान, जहां 52 प्रतिशत एससी उत्तरदाताओं ने कहा कि नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी से हिंसा और धमकी बंद हो जाएगी, वहीं 52 प्रतिशत एसटी उत्तरदाताओं ने अपनी भावना साझा नहीं की।

81% भारतीयों की राय- धर्म के नाम पर धमकी देने वालों को अरेस्ट किया जाए
विशेष रूप से, सर्वेक्षण के दौरान, अधिकांश भारतीयों – 81 प्रतिशत ने कहा कि धर्म के नाम पर धमकी देने वालों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर एनडीए के मतदाताओं और विपक्षी समर्थकों के विचारों में एकमत थी। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए के 80 फीसदी वोटर और 82 फीसदी विपक्षी समर्थकों का मानना है कि धर्म के नाम पर धमकियां देने वालों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

ज्यादातर भारतीयों की राय- आतंक, हिंसा के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वाले किए जाएं अरेस्ट
इसी तरह, विभिन्न सामाजिक समूहों के अधिकांश उत्तरदाताओं ने धर्म के नाम पर धमकी देने वालों की गिरफ्तारी की मांग की। सर्वेक्षण के दौरान 80 फीसदी यूसीएच, 81 फीसदी ओबीसी, 83 फीसदी मुस्लिम, 79 फीसदी एससी और 79 फीसदी एसटी उत्तरदाताओं ने जोर देकर कहा कि आतंक और हिंसा फैलाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वालों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

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