
इंदौर। कर्बला मेले को आयुक्त के निर्देश पर दी गई अनुमति को ताबड़तोड़ महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने गुरुवार की रात वर्चुअल बैठक बुलाकर निरस्त कर डाला। मगर यह विवादित और अविवेकपूर्ण फैसला 24 घंटे भी नहीं टिक सका और कल हाईकोर्ट ने एमआईसी के फैसले को पकड़ते हुए पहले की अनुमति दे डाली। कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए कहा कि महापौर के ऐसे ही फैसलों के कारण शहर के फजीते हो रहे।
अग्रिबाण ने कल सुबह ही यह खबर दे दी थी कि कर्बला मेले का आयोजन जारी रहेगा, क्योंकि एमआईजी को इस तरह के फैसले लेने का अधिकार ही नहीं है। यह शासन, प्रशासन और पुलिस विभाग से जुड़ा मामला है और शहर की कानून व्यवस्था भी बिगड़ सकती है। हर साल कर्बला मैदान पर तीन दिवसीय मेला लगता है और इस बार भी वक्फ कमेटी ने मेले की सभी तैयारी कर ली और विधिवत अनुमति भी हासिल की। मगर अचानक महापौर ने वर्चुअली बैठक बुलाकर एमआईसी का प्रस्ताव पारित करते हुए अपर आयुक्त द्वारा दी गई अनुमति को निरस्त कर दिया, जिसके चलते वक्फ कमेटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और महापौर परिषद् के प्रस्ताव को खारिज करते हुए पहले की अनुमति बहाल रखी, जिसको लेकर कांग्रेस भी आक्रामक रही।
शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि हाईकोर्ट के साथ-साथ शासन-प्रशासन का आभार, जो उसने शहर का साम्प्रदायिक माहौल नहीं बिगडऩे दिया। वहीं महापौर के ऐसे बचकाने फैसले दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे शहर के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं हासिल नहीं है, दूसरी तरफ इस तरह के विवादित निर्णय लिए जाते हैं। जबकि महापौर खुद विधि विशेषज्ञ भी हैं, मगर उन्होंने विधि के विपरित जाकर एमआईसी का निर्णय लिया, जो उनके विधिक जानकारी पर भी सवालिया निशान लगाता है। हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह अनुमति इस साल के लिए है और अगले साल मेला शुरू होने के ढाई महीने पहले निगम को आवेदन देना होगा और निगम प्रशासन भी मेला शुरू होने के 30 दिन पहले अपना स्पष्ट निर्णय लेगा। बहरहाल, महापौर ने एक बार फिर अपनी किरकिरी इस तरह के फैसले से करवा ली।
निगम में फिर टकराव शुरू होने के हालात… महापौर के भी खिलाफ हुए अधिकारी
महापौर भार्गव की अधिकारियों के साथ जंग फिर से शुरू होने की तैयारी है। कर्बला मैदान मेले के मामले में महापौर को अधिकारियों का साथ नहीं मिल सका। मेला लगने से एक दिन पहले महापौर ने एमआईसी की वर्चुअल बैठक कर इस अनुमति को निरस्त करने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया। इस बैठक के दौरान हुई चर्चा में महापौर ने सीधा सवाल निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल से किया कि यह अनुमति क्यों दी गई? इस पर महापौर परिषद के सभी सदस्यों की उपस्थिति के बीच आयुक्त द्वारा कहा गया कि राज्य शासन की ओर से कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए थे। इस पर इस बैठक में यह सवाल भी किया गया कि यह निर्देश किसके माध्यम से प्राप्त हुए थे? इस सवाल के जवाब में आयुक्त के द्वारा कहा गया कि कलेक्टर के द्वारा शासन के यह निर्देश हम तक पहुंचाए गए थे। इतनी सारी जानकारी मिल जाने के बावजूद इस बैठक में कर्बला मैदान पर लगने वाले मेले की अनुमति निरस्त की। अलबत्ता न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की गई और महापौर परिषद के फैसले को क्वैश कर दिया गया। परिषद की बैठक में फैसला होने के बाद भी जब अधिकारियों ने आदेश जारी नहीं किया तब यह लग गया था कि अब एक बार फिर नेता नगरी की निगम के अधिकारियों के साथ जंग शुरू हो गई है। जब गुरुवार की दोपहर में ही महापौर को यह जानकारी दे दी गई थी कि मेला के लिए शासन के निर्देश के आधार पर अनुमति जारी कर दी गई है, फिर भी महापौर के द्वारा बैठक के दौरान मेले की अनुमति दिए जाने पर आश्चर्य जताया गया।
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