
इंदौर। अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से अंकुश लगाने और वैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने के लिए नया अधिनियम लाया जा रहा है। नगरीय आवास और विकास मंत्रालय बीते कई दिनों से इसी कवायद में जुटा रहा और सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश कॉलोनी एक्ट 2026 का प्रारुप तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें अनुमति के बाद 5 साल में कॉलोनी को विकसित करना होगा। नहीं तो दी गई अनुमतियां रद्द हो जाएंगी।
दूसरी तरफ नया फायर सेफ्टी एक्ट भी तैयार हो गया है, जो पिछले साल ही लागू हो जाना था। मगर लगातार संशोधन के चलते विलंब हुआ। अब मध्यप्रदेश अग्रिशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक का प्रारुप भी तय हो गया है और कैबिनेट मंजूरी के बाद संभवत: अभी जो 20 जुलाई से विधानसभा का मानसून स्तर शुरू हो रहा है उसमें इसे पेश कर मंजूर कर दिया जाएगा। इन दोनों महत्वपूर्ण प्रारुपों को लेकर पिछले दिनों विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में विस्तृत चर्चा की और इस संबंध में श्री विजयवर्गीय ने महत्वपूर्ण सुझाव भी सौंपे। अभी देश के अलग-अलग हिस्सों में और मध्यप्रदेश में भी आगजनी की भीषण घटनाएं हो चुकी हैं। इंदौर में ही शॉर्ट सर्किट और ईवी वाहन चार्जिंग के चलते दो घटनाओं में पूरा परिवार खत्म हो गया।
वहीं लखनऊ की कोचिंग क्लास में लगी आग के बाद प्रशासन, निगम लगातार बिल्डिंगों को सील करने में जुटा है और अभी तक 150 से अधिक बिल्डिंगें सील कर दी है। दूसरी तरफ नया अग्रि शमन और आपातकालीन सेवाएं विधेयक का प्रारुप भी तैयार हो गया है, जिसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति ने मंजूरी भी दे दी है। बीते एक साल से इस नए फायर सेफ्टी एक्ट को लागू करने के प्रयास चल रहे हैं। अब इस नए एक्ट में15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली बिल्डिंगें, खासकर स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, होटल या अन्य औद्योगिक प्रयोजन वाली फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा और उसके बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा और नागरिकों से भी सम्पत्ति कर के साथ फायर सेफ्टी टैक्स वसूली भी संभव है।
तमाम बड़े आयोजन जिनमें मेले, धार्मिक समारोह, राजनीतिक कार्यक्रमसे लेकर शादियों जैसे आयोजनों में भी लगाए जाने वाले पांडालों, डोम और अस्थायी स्ट्रक्चर के लिए कड़े फायर सेफ्टी नॉर्म रहेंगे। दूसरी तरफ कॉलोनाइजेशन एक्ट में भी बदलाव किया जा रहा है। अवैध कॉलोनाइजेशन में अब 5 करोड़ रुपए तक के जुर्माने के साथ 10 साल तक की सजा भी हो सकेगी और अनुमति मिलने पर 5 साल में सभी विकास कार्य करना होंगे। अन्यथा दी गई अनुमतियां निरस्त हो जाएंगी। अवैध कॉलोनाइजेशन पर पूरी तरह से सख्ती रहेगी, जिसमें वार्ड दरोगा से लेकर कलेक्टर तक की जिम्मेदारी तय की जाएगी और पुलिस द्वारा अलग शिकायत मिलने पर अगर कार्रवाई नहीं की जाती तो संबंधित थाना प्रभारी भी दोषी ठहराए जा सकेंगे। निगम सीमा और पंचायत में कॉलोनाइजेशन एक्ट अब एक समान रहेगा और एक ही लाइसेंस पर काम किया जा सकेगा। प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड, नजूल, पुरातत्व, ग्रीन बेल्ट, खेल मैदान, बगीचे, नदी-नालों या अधिसूचित की गई जमीनों पर कॉलोनी काटने के मामले में कड़े प्रावधान भी किए गए हैं। बिल्डर-कॉलोनाइजर को 45 दिन में आवश्यक अनुमतियां प्रदान करने का भी प्रावधान किया जा रहा है।
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