नासिक। महाराष्ट्र के नासिक (Nashik) स्थित अंबाड इंडस्ट्रियल एस्टेट (Ambad Industrial Estate) के दत्तानगर इलाके में दूषित पानी की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अंबाड के वार्ड नंबर 27 में करीब 25 हजार लोगों को दूषित पानी की आपूर्ति होने का आरोप है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंदे पानी के इस्तेमाल से अब तक 119 लोग त्वचा संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। लोगों ने प्रशासन से जल्द साफ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अंबाड इंडस्ट्रियल एरिया की कुछ प्लेटिंग और कोटिंग फैक्ट्रियों से पीले रंग का केमिकलयुक्त पानी नालों में छोड़ा जा रहा है। उनका दावा है कि यह दूषित पानी नालियों के साथ-साथ हैंडपंप और कुओं तक पहुंच रहा है। इससे मारुति संकुल, दत्तानगर और तुलजाभवानी इलाकों में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में नियमित और पर्याप्त दबाव के साथ पानी की आपूर्ति नहीं होती। पानी के स्टोरेज टैंक की सुविधा भी पर्याप्त नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हैंडपंप और कुओं पर निर्भर हैं। लोगों का आरोप है कि इन स्रोतों का पानी अब केमिकल प्रदूषण की चपेट में आ गया है।
दूषित पानी के इस्तेमाल से खुजली, जलन, चकत्ते और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं बढ़ने की शिकायत की गई है। स्थानीय निवासियों ने पानी के तत्काल सैंपल लेकर उसकी जांच कराने और प्रदूषण के लिए जिम्मेदार फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
समस्या को लेकर वार्ड काउंसलर नितिन दातिर ने नासिक नगर निगम (NMC) प्रशासन और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) से तत्काल मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। मंगलवार को दातिर ने पार्षद किरण गमने दाराडे और प्रियंका डोंडे समेत शिवसेना के कई पदाधिकारियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों और पार्षदों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी नाराजगी जताई। एक तख्ती पर लिखा था, ‘हमें पीने का पानी दो या आत्महत्या करने की अनुमति दो।’ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लगातार दूषित पानी मिलने और नियमित जलापूर्ति नहीं होने से लोगों के सामने गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि इंडस्ट्रियल एरिया की कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक पानी वार्ड नंबर 27 के मारुति संकुल, दत्तानगर, तुलजाभवानी और नवनाथ महाराज मंदिर के आसपास के इलाकों तक पहुंच रहा है। इससे नालियां, हैंडपंप और कुएं प्रदूषित होने का दावा किया गया है।
लोगों ने प्रशासन से दूषित पानी के नमूनों की जांच, दोषी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई और नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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