
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा में कफ सिरप की वजह से बच्चों की मौत का सिलसिला नहीं रूक रहा है। मंगलवार को दो और बच्चों की मौत हो गई है। पहला मामला तामिया ब्लॉक के भरियाढना गांव का है, जहां ढाई साल की धानी डेहरिया की नागपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर द्वारा दिए गए कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी और उसकी किडनी फेल हो गई। वहीं दो साल की जेयूशा यदुवंशी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
जेयूशा छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव की रहने वाली है। उसका भी प्राथमिक उपचार प्रवीण सोनी ने किया था। जेयूशा का इळाज भी नागपुर के GMC हॉस्पिटल में चल रहा था। इस तरह से अब तक कफ सिरप की वजह से छिंदवाड़ा में 16 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं बैतूल में दो और पाढुर्ना में एक बच्चे की मौत हुई है। एमपी में बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अभी तक कुल 19 बच्चों की मौत हुई है। वहीं राजस्थान में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है।
धानी के पिता का कहना है कि बच्ची को कोल्ड्रिफ सिरप ही दिया गया था। जिले के अन्य मामलों में भी ज्यादातर बच्चों ने यही सिरप या नेक्स्ट्रो-DS सिरप लिया था। परिजनों का आरोप है कि इन्हीं दवाओं में मौजूद किसी जहरीले तत्व ने बच्चों की किडनी को नुकसान पहुंचाया है। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ. पवन नंदूरकर ने बताया कि अब तक की जांच में सभी बच्चों में किडनी फेल्योर पाया गया है।
दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत की असली वजह सिरप में मौजूद कोई केमिकल था या कुछ और। लगातार हो रही मौतों से अभिभावकों में दहशत का माहौल है। कई परिवार अपने बच्चों को बाजार से खरीदी जाने वाली सिरप देने से बच रहे हैं। गांवों में चर्चा है कि बच्चों की बीमारी मामूली सर्दी-खांसी से शुरू होकर कुछ ही दिनों में जानलेवा बन रही है।
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