
2 करोड़ 84 लाख प्रोत्साहन राशि मिली, साढ़े 3 करोड़ अब भी बाकी
इंदौर। अंतरजातीय विवाह (inter-caste marriages ) प्रोत्साहन योजना के ताजा आंकड़े सामाजिक समरसता (social harmony) की एक सकारात्मक तस्वीर (positive picture) पेश कर रहे हैं। जारी विवरण के अनुसार कुल 314 दंपतियों ने जातिगत सीमाओं को तोड़ते हुए विवाह किया, जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से जुड़ी है।
आंकड़ों के मुताबिक 161 मामलों में युवक एससी वर्ग से हैं, जिन्हें सामान्य और ओबीसी वर्ग की युवतियों ने जीवनसाथी के रूप में अपनाया। इनमें 71 युवतियां सामान्य वर्ग से और 90 युवतियां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं। वहीं 153 मामलों में युवतियां एससी वर्ग से हैं, जिन्हें सामान्य और ओबीसी वर्ग के युवकों ने जीवनसाथी बनाया। इनमें 64 युवक सामान्य वर्ग से तथा 89 युवक ओबीसी वर्ग के हैं।
344 लाख अब भी बाकी
जारी विवरण के मुताबिक कुल 314 दंपतियों के प्रकरणों में भुगतान की कार्रवाई की गई है। इस प्रकार कुल 161 युवक और 153 युवतियों को मिलाकर 314 दंपतियों को योजना का लाभ दिया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार इन प्रकरणों में अब तक 2 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि 344 लाख रुपए की स्वीकृत राशि अभी भुगतान के लिए लंबित है। विभाग का कहना है कि लंबित प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और पात्र हितग्राहियों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
तकनीकी कारणों से अटका भुगतान
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य समाज में जातिगत भेदभाव को कम कर समानता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है। शासन द्वारा पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर सम्मानपूर्वक वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए सहयोग दिया जाता है। जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों की अपूर्णता या तकनीकी कारणों से कुछ भुगतान लंबित हैं, जिन्हें प्राथमिकता से निपटाया जा रहा है। विभाग ने हितग्राहियों से आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी करने की अपील की है।
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