
इन्दौर। आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हुआ और यह पूर्णिमा तक रहेगा। 3 मार्च होलिका दहन के साथ इसका समापन हो जाएगा। इन आठ दिनों में सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। आज सुबह 7.02 बजे से होलाष्टक प्रारंभ हुआ । होलाष्टक के इन 8 दिनों की अवधि को शास्त्रों व परंपराओं में अशुभ माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित 16 संस्कारों पर रोक रहेगी।
शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं होते, पर दान-पुण्य, ध्यान और मंत्र साधना के लिए उत्तम है। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा भगवान विष्णु, शिव और हनुमान की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। इन 8 दिनों में नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हवन-पूजन करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन का दान करें। होलाष्टक के आठ दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू सहित आठों ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं।
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए
होलाष्टक के आठ दिनों तक शादी-विवाह जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके साथ ही भूमि, भवन और वाहन आदि की भी खरीदारी को शुभ नहीं माना गया है, वहीं नवविवाहिताओं को इन दिनों में मायके में रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि दुर्भाग्यवश इन दिनों किसी की मौत होती है तो उसकी अंत्येष्टि संस्कार के लिए भी शांति पूजन करवाई जाती है।
यह है होलाष्टक का वैज्ञानिक महत्व
होलाष्टक ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा है। यह समय सर्दी से गर्मी के संक्रमण का होता है, जिससे वातावरण में बैक्टीरिया/वायरस अधिक सक्रिय होते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। मौसम बदलने के दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। माना जाता है कि इन 8 दिनों में हवा में निगेटिव एनर्जी अधिक होती है, जो मानसिक एकाग्रता को प्रभावित करती है।
होलाष्टक में क्या करना चाहिए
होलाष्टक के दौरान पूजा-पाठ का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दौरान मौसम में तेजी से बदलाव होता है, इसलिए अनुशासित दिनचर्या को अपनाने की सलाह दी जाती है। होलाष्टक में स्वच्छता और खानपान का उचित ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। होलाष्टक में भले ही शुभ कार्यों के करने की मनाही है, लेकिन इन दिनों में अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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