
भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ (Farmer Welfare Year) के रूप में मनाने की दिशा में राज्य सरकार (State Goverment) ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) की अध्यक्षता में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट (Agriculture Cabinet) आयोजित की गई। यह बैठक जनजातीय अंचल में पहली बार आयोजित हुई। सीएम ने कहा कि इस क्षेत्र में खेती, बगवानी हर क्षेत्र में उन्नति हुई है। इस क्षेत्र में सभी प्रकार की जल परियोजनाएं पूरी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार सरोवर बांध और नर्मदा घाटी परियोजनाओं के माध्यम से निमाड़ का सूखा खत्म हुआ, अब यहां से पलायन खत्म हुआ है। यह क्षेत्र अब हरियाली और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है। खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी क्षेत्र में खेती, बागवानी और फलोद्यान में उल्लेखनीय उन्नति हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर वर्ष को जनता के कल्याण से जोड़ रही है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टेंट-तंबू में भी किसानों की नीति बनाने का निर्णय सरकार की किसान-समर्पित सोच को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि कैबिनेट में 6 विभागों की 16 योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं का कुल वित्तीय भार 27,746 करोड़ रुपए होगा, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें कृषि विभाग की 3502 करोड़ दो योजनाएं, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण की 4264 करोड़ की तीन योजनाएं, पशुपालन एवं डेयरी विकास की 9508 करोड़ की चार योजनाएं, मछुआ कल्याण की 218.50 करोड़ की दो योजनाएं, सहकारिता विभाग की 8186 करोड़ की चार योजनाएं, नर्मदाघाटी विकास की 2068 करोड़ की दो योजनाएं को मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदाघाटी विकास के तहत बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इसमें बरला उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना को स्वीकृति दी है। इसमें 15 गांवों की 15,500 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस पर 861 करोड़ रुपए की लागत आएगी। वहीं, पानसेमल सिंचाई परियोजना में 53 गांवों की 22,500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। इसकी अनुमानित लागत1208 करोड़ रुपए आएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी कैबिनेट ने भिलट देव स्थल के दर्शन किए। साथ ही यहां पर कई विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने निमाड़ के पारंपरिक आदिवासी उत्सव भगोरिया को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और इसके आयोजन में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कैबिनेट के फैसलों का लाभ निमाड़ के साथ-साथ पूरे मालवा अंचल को मिलेगा। नर्मदापुरम क्षेत्र अब बेहतर सिंचाई और आधुनिक खेती के लिए पहचाना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उड़द प्रोत्साहन के रूप में 600 रुपए का प्रति क्विंटल का बोनस प्रारंभ किया। इसके आधार पर लगभग 4.15 लाख हेक्टेयर में बोवनी की संभावना जताई गई हैं। सीएम ने कहा कि सोयाबीन के लिए भावांतर योजना के तहत भुगतान कर मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य बना है। अब तिलहन में भी सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। सरसो का अनुमानित उत्पादन 15.71 लाख मैट्रिक टन होगा। सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोषण कार्यक्रम की निरंतरता के लिए पांच वर्षों के लिए 3285 करोड़ रुपए देने का प्रयास किया है। यह राशि धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज की फसलों से जुड़ी है।
मध्य प्रदेश देश का एक ऐसा राज्य है जो प्राकृतिक खेती के लिए पूरे देश में जाना जाता है। बड़वानी जिले के 25 किसानों को प्राकृतिक खेती का मास्टर ट्रेनर बना रहे हैं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले इसके लिए हम 25 किसानों को मास्टर ट्रेनर बनाने के लिए प्रदेश के बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। यहां से शुरुआत होने के बाद दूसरे क्षेत्रों के भी किसानों को भी शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री कृषि सिचांई योजना के तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2026 तक 2393.97 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 2031 तक के लिए 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि पिछले विधानसभा के माध्यम से किसान कल्याण वर्ष में घोषित की। इस राशि को आज जोड़े तो यह राशि 27746 के साथ 10 हजार की राशि जोड़े तो 38 हजार की राशि राज्य की बड़ी योजनाओं के लिए मंजूरी दी है। किसानों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। अपने किसान भाइयों को समृद्ध बनाकर राज्य को हम प्रगति के पथ पर ले जाएंगे।
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