
नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का शुभारंभ हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस साल यह पर्व मार्च में आ रहा है और होली के समापन के बाद बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान कलश स्थापना (Kalash sthaapana) के साथ मां दुर्गा (Maa Durga) के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, और पहले दिन मां शैलपुत्री की विशेष आराधना की जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी और अगले दिन 20 मार्च शुक्रवार को तड़के 4:52 बजे समाप्त होगी। इसलिए चैत्र नवरात्रि 19 मार्च गुरुवार से शुरू होकर नौ दिनों तक चलेगी। इस दिन कलश स्थापना के साथ पहला व्रत रखा जाएगा।
तीन शुभ योग
इस साल चैत्र नवरात्रि के दौरान तीन शुभ योग बन रहे हैं—शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग। ये तीनों योग अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं, जो व्रत और पूजा में विशेष लाभकारी माने जाते हैं।
कलश स्थापना के मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कलश स्थापना के लिए इस बार दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा और दूसरा दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। अगर सुबह के मुहूर्त में कलश स्थापना संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी यह करना शुभ माना गया है।
पहले दिन के अन्य शुभ मुहूर्त
पहले दिन के लिए विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 से 5:39 बजे, प्रातः सन्ध्या 5:15 से 6:26 बजे, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:18 बजे, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:29 से 6:53 बजे, सायाह्न सन्ध्या 6:32 से 7:43 बजे, अमृत काल रात 11:32 से 1:03 बजे और निशिता मुहूर्त 12:05 से 12:52 बजे तक रहेगा।
इस बार की चैत्र नवरात्रि में शुभ मुहूर्त और योगों का विशेष महत्व है, इसलिए व्रत और पूजा करने वाले भक्तों के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved