भागलपुर। बिहार का भागलपुर जिला (Bhagalpur district of Bihar) अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राचीन मंदिरों (Ancient Temples) के लिए जाना जाता है। यहां कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जिनका इतिहास सदियों पुराना है और जिनसे जुड़ी मान्यताएं लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में एक है कहलगांव क्षेत्र में गंगा नदी के बीच पहाड़ों पर स्थित बाबा बटेश्वर स्थान (Baba Bateshwar Place), जिसे स्थानीय लोग कभी ‘छोटा काशी’ बनने की कगार पर मानते हैं।
भागलपुर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर यह प्राचीन मंदिर गंगा नदी के बीच एक पहाड़ी पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन संरचनाएं और पहाड़ों में बने पुराने तपस्थल इस स्थान की ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं। बताया जाता है कि यहां कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी।
एक गज जमीन की वजह से नहीं बन सका ‘काशी’
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, प्राचीन मान्यता है कि यहां महज एक गज जमीन कम होने के कारण यह स्थान ‘काशी’ के रूप में विकसित नहीं हो पाया। इसी वजह से इसे आज भी ‘छोटा काशी’ कहा जाता है।
मंदिर परिसर में कई ऐसे गुफानुमा स्थान भी हैं जहां संत-महात्मा तपस्या करते थे। सुरक्षा कारणों से इन स्थानों पर फिलहाल पुरातत्व विभाग ने ताला लगा रखा है।
ऋषि वशिष्ठ की तपस्थली मानी जाती है जगह
स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान राम के गुरु वशिष्ठ ऋषि ने भी यहां तपस्या की थी। इसी वजह से इस स्थान का नाम बाबा बटेश्वर स्थान पड़ा।
इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां भगवान शिव के सामने मां काली की प्रतिमा स्थापित है, जो पूरे भारत में विरले ही देखने को मिलती है।
अब सड़क से पहुंचना हुआ आसान
पहले इस मंदिर तक पहुंचना काफी कठिन था, लेकिन अब यहां तक सड़क बन जाने से श्रद्धालुओं को सुविधा मिल गई है। प्रशासन भी इस ऐतिहासिक स्थल के विकास की दिशा में काम कर रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार इस धरोहर को और विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यहां पर्यटन सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना है।
प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन इतिहास और धार्मिक आस्था से जुड़ा बाबा बटेश्वर स्थान आज भी अपने संरक्षण और विकास की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन इसकी भव्यता और रहस्य श्रद्धालुओं को लगातार आकर्षित करते रहते हैं।
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