नई दिल्ली। लोकसभा के बजट सत्र (Budget session of Lok Sabha) के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। विपक्षी गठबंधन (INDIA) ने ओम बिरला (Om Birla) के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया। यह कदम तब उठाया गया जब पहले फरवरी में विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए नोटिस दिया था।
हालांकि TMC ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने की घोषणा की थी और वोटिंग होने पर बिरला के खिलाफ मतदान करने की बात कही थी। इसके बावजूद विपक्ष ने संख्या बल की कमी को देखते हुए फिलहाल प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।
राहुल गांधी ने जताई आर्थिक चिंता
सदन स्थगित होने के बाद Rahul Gandhi ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है। उनके मुताबिक शेयर बाजार पहले ही प्रभावित हो चुका है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।
विपक्ष ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों और खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को भी बड़ा मुद्दा बताया। इन देशों से आने वाला रेमिटेंस भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
युद्ध के असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें चार साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। वहीं Strait of Hormuz पर खतरे की आशंका जताई जा रही है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार का आवागमन होता है।
सरकार की ओर से S. Jaishankar ने राज्यसभा में स्थिति पर बयान दिया और लोकसभा में भी जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन हंगामे के कारण सदन बार-बार स्थगित होता रहा। सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम भंडार पर्याप्त हैं और रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर स्थिति संभाली जा रही है।
सरकार का विपक्ष पर पलटवार
वहीं सरकार ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष स्पीकर के खिलाफ बहस से बच रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री Anurag Thakur ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए वह पीछे हट गया।
सूत्रों के मुताबिक संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju और गृह मंत्री Amit Shah अगले दिन इस मुद्दे पर सदन में जवाब दे सकते हैं। विपक्ष का मानना है कि अभी संख्याबल उनके पक्ष में नहीं है, इसलिए प्रस्ताव को आगे के लिए टाल दिया गया है और फिलहाल पश्चिम एशिया युद्ध के आर्थिक असर को मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
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