
इंदौर। इंदौर नगर निगम द्वारा एक तरफ जहां कान्ह नाले में जेसीबी लगाकर गाद निकालने और सफाई करने का काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ निगम के सफाईकर्मी ही इस नाले में कचरा डालकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। हर साल बारिश के आगमन के पहले नगर निगम द्वारा इस नाले में से गाद निकालने के काम में करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं।
इन दिनों कान्ह और सरस्वती नाले में नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में जेसीबी लगाई गई हैं। इस मशीन के माध्यम से इस नाले के अंदर जमा गाद निकालने का काम किया जा रहा है। जो मशीनें इस काम को कर रही है वह सभी किराए की हैं। हर साल ही गर्मी के मौसम में इस काम को शुरू किया जाता है और बारिश आने के पहले पूरे नाले को इस स्थिति में ला दिया जाता है कि उसमें पानी का प्रवाह बन जाए। इस कार्य पर हर साल नगर निगम करोड़ों की राशि खर्च करता है। निगम द्वारा किए जा रहे काम का एक वीडियो शहर के जागरूक नागरिक ने तैयार किया है। यह वीडियो कृष्णपुरा छत्री का है।
इस वीडियो में एक तरफ जहां निगम की मशीन नाले के अंदर से गाद निकालती हुई नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ निगम के सफाईकर्मी नाले किनारे के क्षेत्र में झाड़ू लगाकर कचरा इक_ा करने के बाद उस कचरे को प्लास्टिक की बोरी के ऊपर रखकर नाले में ही फेंकते हुए नजर आ रहे हैं। जब निगम के कर्मचारी ही कचरा डालेंगे और निगम ही कचरा निकालेगा तो ऐसे में हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते रहेंगे और परिणाम कुछ नहीं निकलेगा। इसके साथ ही पिछले दिनों यह हकीकत भी सामने आई थी कि नगर निगम द्वारा नाले में से गाद निकालकर साइड में ही रखी जा रही है। ऐसे में जब भी बारिश होगी तो यह गाद वापस से बहकर नाले में ही मिल जाएगी।
25 जेसीबी उतार दीं
इन दिनों नगर निगम द्वारा नाले में से गाद निकालने के काम में 25 जेसीबी लगाई गई हैं। नगर निगम द्वारा प्रतिघंटा के किराए पर जेसीबी ली जाती है। इन जेसीबी के माध्यम से गंदगी को निकालकर नाले के किनारे ही रखा जा रहा है। वहां से गंदगी को उठाने का कोई काम अभी शुरू नहीं हुआ है। हकीकत में होना यह चाहिए कि जैसे ही नाले के अंदर से गंदगी निकल जाती है वैसे ही उसे मौके पर से उठाकर किसी दूसरे स्थान पर ले जाकर इसका निष्पादन कर दिया जाना चाहिए।
इसी तरह कर दिए 3 हजार करोड़ खर्च
नगर निगम द्वारा इस काम को करने में जो लापरवाही की जा रही है वह लापरवाही सर चढक़र बोल रही है। हमेशा से यह सवाल उठता रहा है कि पिछले 10 साल के दौरान नगर निगम द्वारा इस नाले को नदी बनाने के काम पर 3500 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है तो आखिर यह राशि कहां गई और यह नाला नदी क्यों नहीं बना? हकीकत तो यह है कि नगर निगम द्वारा इस तरह से लापरवाहीपूर्वक कार्य किया जाता है, जिसके चलते पैसा पानी में जाता है और परिणाम कुछ नहीं आता है।
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