
इंदौर। इंदौर के सरकारी अस्पतालों से सम्बंधित प्रसूता महिलाओं को जननी सुरक्षा और प्रसूता सहायता राशि 2 माह से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद अब तक नहीं मिली है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत 40 प्रसूता महिलाओं को लगभग 3 लाख 93 हजार 200 रुपए की सहायता राशि दी जाना थी, मगर वह अभी तक अटकी, मतलब लम्बित पड़ी है।
इसके खिलाफ लगभग 40 पीडि़त प्रसूताओं अथवा उनके परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें कर रखी हैं, जो कि लगभग 50 से भी ज्यादा दिनों से लम्बित हैं। शिकायतों की लम्बित समयसीमा से साबित होता है कि महिलाओं को प्रसव हुए 2 माह से भी ज्यादा समय हो चुका है। इतने दिनों बाद भी सहायता राशि नहीं मिलने का यह खुलासा सीएमएचओ सहित स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ झोनल अधिकारी, बीएमओ, सीएमओ के अलावा अन्य विभागीय अफसरों की मौजूदगी में सीएम हेल्पलाइन शिकायत सम्बन्धित विभागीय समीक्षा की मीटिंग के दौरान हुआ।
इस मामले में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना था कि शिकायत वाले मामलों में कुछ प्रकरण तो ऐसे हैं, जो इस योजना के मापदंड अथवा शासकीय नियमों के मुताबिक ही नहीं हैं। मतलब शासकीय शर्तों के अनुसार वह अपात्र होते हुए भी सरकारी सहायता राशि के लिए दावा करते आ रहे हैं। जैसे कि कई शिकायतकर्ता श्रमिक प्रसूता सहायता राशि चाहते हैं, मगर उनके पास पंजीकृत मजदूर कार्ड ही नहीं है। इसी तरह अन्य तकनीकी वजह भी है।
जननी सुरक्षा योजना में 1000 से 1400 रुपए की सहायता
जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे गर्भवती ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव होने पर 1400 रुपए और शहरी महिलाओं को 1000 रुपए मिलते हैं। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी आशाओं को भी 600 से 400 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। एमपी मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और स्वास्थ्य के लिए 16,000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलती है।
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