नई दिल्ली। दुनिया की global tech giant)दिग्गज टेक कंपनी Amazon ने अंतरिक्ष और सैटेलाइट इंटरनेटsatellite internet) की दौड़ में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। कंपनी ने $11.57 अरब (करीब ₹1,07,838 करोड़) में सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Globalstar को खरीदने का ऐलान किया है। इस डील के बाद एलन मस्क की Starlink और जेफ बेजोस की Amazon के बीच स्पेस टेक्नोलॉजी में मुकाबला और तेज हो गया है।
सैटेलाइट इंटरनेट में Amazon की बड़ी छलांग
Amazon पहले से ही अपने प्रोजेक्ट ‘Kuiper’ के तहत सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क बना रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2029 तक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 3,200 सैटेलाइट्स तैनात किए जाएं। Globalstar की एंट्री के बाद Amazon का नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा, क्योंकि कंपनी के पास पहले से ही 200 से ज्यादा सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इस अधिग्रहण से Amazon को न सिर्फ टेक्नोलॉजी बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्लोबल स्तर पर अपनी पकड़ भी मजबूत करने का मौका मिलेगा।
Direct-to-Device टेक्नोलॉजी से बदलेगा इंटरनेट का भविष्य
Globalstar की सबसे बड़ी ताकत उसकी Direct-to-Device (D2D) टेक्नोलॉजी है। इस तकनीक की मदद से मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकते हैं, यानी इसके लिए किसी टावर या ग्राउंड नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। यह तकनीक उन क्षेत्रों में बेहद उपयोगी है जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता या इमरजेंसी सेवाओं के लिए कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। Amazon का फोकस अब इसी तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करने पर है, जिसे कंपनी 2028 तक लॉन्च करने की योजना बना रही है।
Apple के साथ साझेदारी रहेगी बरकरार
Globalstar पहले से ही Apple के साथ काम कर रही है। iPhone और Apple Watch में मिलने वाले Emergency SOS और Find My जैसे फीचर्स इसी सैटेलाइट नेटवर्क पर आधारित हैं। Amazon ने स्पष्ट किया है कि इस डील के बाद भी Apple के साथ साझेदारी जारी रहेगी।
Apple ने 2024 में Globalstar में करीब $1.5 बिलियन का निवेश कर 20% हिस्सेदारी हासिल की थी, जिससे यह कंपनी पहले से ही तकनीकी रूप से मजबूत स्थिति में थी।
Starlink की चुनौती और मस्क की बढ़त
एलन मस्क की कंपनी SpaceX का Starlink फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में सबसे आगे है। कंपनी के पास करीब 10,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स का विशाल नेटवर्क है और यह 90 लाख से अधिक यूजर्स को सेवा दे रही है।
Starlink हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के साथ-साथ अब D2D तकनीक पर भी तेजी से काम कर रही है। ऐसे में Amazon के लिए यह प्रतिस्पर्धा आसान नहीं होगी, लेकिन Globalstar की तकनीक से उसे नई मजबूती जरूर मिलेगी।
स्पेस में नई ‘टेक वॉर’ की शुरुआत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल एक कंपनी अधिग्रहण नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में प्रभुत्व की नई जंग की शुरुआत है। जहां एक तरफ Elon Musk अपने Starlink नेटवर्क को विस्तार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ Jeff Bezos की Amazon अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है।
Globalstar की टेक्नोलॉजी और Amazon की फाइनेंशियल ताकत मिलकर आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह बदल सकती है।