
इन्दौर। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए इस बार किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कारण है सैटेलाइट आधारित सत्यापन रिपोर्ट में गड़बड़ी, जिसके चलते ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों को स्लॉट ही जारी नहीं हो पा रहे हैं।
राज्य स्तर पर जांच में सामने आया है कि कई जगहों पर जहां जमीन पर गेहूं की फसल नहीं है या निर्माण हो चुका है, वहां भी रिकॉर्ड में गेहूं दर्शाया गया, जबकि कई वास्तविक किसानों के खेत सिस्टम में मैच नहीं हो रहे हैं। इसी विसंगति के कारण हजारों किसानों को गेहूं बेचने के लिए स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं और उपार्जन अटक गया है।
इंदौर में 3595 मामले लंबित
जिले की रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में खसरे अभी भी सत्यापन के इंतजार में हैं। आंकड़ों में सामने आया है कि सांवेर में 1610, हातोद में 809, डॉ. आंबेडकर नगर (महू) में 614, कनाडिय़ा में 280 और बिचौली हप्सी में 158 मामले लंबित हैं। कुल मिलाकर जिले में करीब 3595 खसरे अभी पेंडिंग हैं, जिनका सत्यापन पूरा होने के बाद ही किसानों को स्लॉट मिल सकेगा।
गलत गिरदावरी पर सख्ती
वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कई जगह राजस्व अमले द्वारा बिना सही जांच के सत्यापन करते हुए गिरदावरी, यानी वो रिपोर्ट तैयार कर दी है, जिसमें खसरे के हिसाब से किस जमीन पर कितने हिस्से में क्या बोया गया है यह लिखा जाता है, जिसके कारण गलत खसरे पास हो गए। सैटेलाइट मैप से मिलान करने पर यह गड़बड़ी सामने आई है। इसे गंभीर मानते हुए अधिकारियों ने नाराजगी जताई है।
फील्ड में जाकर जांच के निर्देश
कलेक्टर शिवम वर्मा ने सभी तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि पटवारी के साथ मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करें और यह सुनिश्चित करें कि संबंधित खेत में वास्तव में गेहूं की फसल बोई गई है या नहीं। यह कार्य तीन दिन के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्यापन पूरा होने तक स्लॉट नहीं
स्पष्ट किया गया है कि जब तक यह पुन: सत्यापन पूरा नहीं होगा, तब तक संबंधित खसरों के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने का स्लॉट बुक नहीं किया जाएगा। इस स्थिति में किसान मंडियों के चक्कर काट रहे हैं और स्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उपार्जन व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
तीन स्तर पर होगा सत्यापन… जारी आदेश के अनुसार अब
– 100 प्रतिशत सत्यापन तहसीलदार करेंगे।
– 20 प्रतिशत सत्यापन एसडीएम द्वारा किया जाएगा।
– 5 प्रतिशत रैंडम जांच कलेक्टर स्तर पर होगी।
साथ ही हर सत्यापन में संबंधित अधिकारी का नाम और पद भी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
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