
नई दिल्ली। वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार यह तिथि आज 17 अप्रैल को शुक्रवार के दिन पड़ रही है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता है कि अमावस्या पर व्रत, दान और पूजा करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वहीं शुक्रवार का दिन धन, वैभव और समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र देव को समर्पित माना जाता है।
इसी कारण इस दिन मां लक्ष्मी और शुक्र देव की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में पूजा करने से सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है और कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।
शुक्र देव की पूजा विधि
अमावस्या की सुबह स्नान कर पूजा स्थान को स्वच्छ करने की सलाह दी जाती है। इसके बाद गणेश जी के साथ शुक्र देव की प्रतिमा या चित्र की स्थापना कर पूजा प्रारंभ करने का विधान बताया गया है। यदि शुक्र देव का चित्र उपलब्ध न हो, तो शिवलिंग की पूजा भी की जा सकती है।
पूजा के दौरान गणेश जी को हल्दी, कुमकुम, अक्षत और रोली अर्पित करने के बाद शुक्र देव का ध्यान कर सफेद फूल, अक्षत आदि चढ़ाने की परंपरा है। साथ ही ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ या ‘द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ मंत्र का जाप करने का उल्लेख मिलता है। पूजा में दूध और सफेद मिठाई का भोग लगाने की भी मान्यता है।
शिवलिंग पूजन की स्थिति में जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और चंदन अर्पित करने का विधान बताया गया है। अंत में पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करने की परंपरा है।
शुक्र ग्रह से जुड़े उपाय
मान्यता के अनुसार, शुक्र ग्रह से जुड़े दोष होने पर जीवन में आर्थिक समस्याएं और वैवाहिक जीवन में असंतुलन देखा जा सकता है। ऐसे में अमावस्या के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, मिश्री, इत्र आदि का दान करने की सलाह दी जाती है।
पीपल वृक्ष की पूजा का महत्व
इस दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित कर परिक्रमा करने और सुबह-शाम दीपक जलाने का भी महत्व बताया गया है। साथ ही पितरों की शांति के लिए जरूरतमंदों को भोजन, अनाज, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा का उल्लेख किया गया है।
(यह खबर केवल धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है।)
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