नई दिल्ली। महिला आरक्षण (women’s reservation) से जुड़े विधेयकों पर लोकसभा (Lok Sabha) में चल रही चर्चा गुरुवारको उस समय हंगामे में बदल गई, जब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने एक चर्चित आत्महत्या मामले का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम लिया।
दरअसल, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत महिला आरक्षण से जुड़े ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और अन्य संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष को घेर रही है, जबकि उसके अपने नेताओं पर महिलाओं के शोषण के आरोप लग चुके हैं।
“ढोल पीटने के लिए लाया गया बिल”
सावंत ने कहा कि सरकार यह बिल केवल “ढोल बजाने” के लिए लाई है और परिसीमन से जोड़ने के कारण ही इसका विरोध हो रहा है। उन्होंने मणिपुर की स्थिति का जिक्र करते हुए सरकार की कथनी और करनी में अंतर बताया। साथ ही उन्होंने कुलदीप सिंह सेंगर और बृज भूषण शरण सिंह जैसे नामों का हवाला देते हुए सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला।
सावंत के आरोपों के जवाब में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सत्तापक्ष के नेताओं का जिक्र किया जाएगा तो विपक्षी नेताओं पर भी चर्चा होगी। इसी दौरान उन्होंने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या का संदर्भ देते हुए आदित्य ठाकरे का नाम लिया, जिससे सदन का माहौल अचानक गरमा गया।
विपक्ष का विरोध, माफी की मांग
दुबे के बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ा एतराज जताया। सुप्रिया सुले समेत कई सांसदों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए माफी की मांग की। अरविंद सावंत ने भी कहा कि इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
स्पीकर की दखल, बयान हटाए गए
हंगामा बढ़ता देख पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों की विवादित टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद कुछ देर तक सदन में शोर-शराबा जारी रहा।
पुराने मामले का संदर्भ
भाजपा सांसद का इशारा 2020 में हुई दिशा सालियान की मौत के मामले की ओर माना जा रहा है। इस केस को लेकर पहले भी राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। मार्च 2025 में दिशा सालियान के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच की मांग की थी।
विपक्ष का रुख
विपक्ष ने साफ किया कि वह महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि सरकार के तरीके और विशेष सत्र बुलाने के उद्देश्य पर सवाल उठा रहा है। सावंत ने कहा कि 2023 में सभी दलों ने इस मुद्दे का समर्थन किया था, इसलिए सरकार को इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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