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स्वतंत्र भारत की नींव रखने में नारी शक्ति का असीमित योगदान

April 17, 2026

  • नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के तहत महाकौशल विवि में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों ने रखे अपने विचार

जबलपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश व मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय आयोग के पत्र के परिपालन में महाकौशल विश्वविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ज्ञान की देवी सरस्वती माँ की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रजव्वलन कर किया गया। कुलगुरु डॉ. आरसी मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के अंतर्गत छात्राओं को कानूनी अधिकार, साइबर सुरक्षा, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और वित्तीय साक्षरता सहित अन्य विषयों जैसे नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।


  • आत्मरक्षा एवं शारीरिक सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रतिभागियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, मार्शल आर्ट्स, जूडो-कराटे तथा ताइक्वांडो का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा हीमोग्लोबिन जांच, पोषण संबंधी परामर्श तथा मानसिक स्वास्थ्य विषय पर व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों के समग्र स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में वृद्धि हो सके। कुलसचिव डॉ. राम प्रकाश चौबे ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 (106वां संवैधानिक संशोधन) की विशेषताएं बताते हुए कहा कि इसके तहत 33 प्रतिशत आरक्षण- लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कानून परिसीमन के बाद लागू होगा, जो जनगणना के आधार पर तय किया जाएगा। यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे संसद की मंजूरी से बढ़ाया जा सकता है। आरक्षित सीटों को हर चुनाव के बाद रोटेशन के आधार पर तय किया जाएगा। डा. अंजली पांडेय ने कहा कि इस अधिनियम से राजनीतिक सशक्तिकरण वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 14-15 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 33 फीसदी सुनिश्चित किया जाएगा। यह कानून संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देकर राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को मजबूत करेगा। यह अधिनियम 2029 के लोकसभा चुनावों में लागू होने की संभावना है, जिसके लिए सरकार ने परिसीमन की प्रक्रिया तेज कर दी है। रुपाली मिश्रा ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान सभा के निर्णयों तक, स्वतंत्र भारत की नींव रखने में भारत की नारीशक्ति ने असीमित योगदान दिया है, इतिहास गवाह है और आज़ादी के बाद भी जिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिला, उन्होंने देश के लिए बहुत शानदार काम किया है। हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, महिलाएं जहां भी रहीं हैं, उन्होंने अपनी अलग लेगसी बनाई है। मंच संचालन डा निमिषा तिवारी ने किया इस दौरान समस्त विभागों से विद्यार्थी एवं अधिकारी व कर्मचारी गैन उपस्थित रहे।

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