
नई दिल्ली । समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) के क्षेत्र में भारत (India) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को नई दिशा मिली है। स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) से विकसित NASM-SR मिसाइल (NASM-SR Missile) का सफल परीक्षण किया गया है, जो नौसेना (Navy) की ताकत को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। यह परीक्षण आधुनिक समुद्री युद्ध रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
NASM-SR यानी Naval Anti-Ship Missile Short Range एक कम दूरी की हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल है, जिसे खास तौर पर नौसेना के हेलीकॉप्टरों से लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीक निशाना लगाने की क्षमता और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरने की तकनीक है, जिससे इसे रडार द्वारा पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
परीक्षण के दौरान इस मिसाइल को एक नौसैनिक हेलीकॉप्टर से दागा गया और कुछ ही सेकंड के अंतराल में लगातार दो मिसाइलें लॉन्च की गईं। इस तकनीक को सॉल्वो लॉन्च कहा जाता है, जिसमें एक साथ या तेजी से कई मिसाइलें दागकर दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भ्रमित किया जाता है। इस प्रक्रिया से लक्ष्य पर सफल हमले की संभावना काफी बढ़ जाती है।
यह मिसाइल लगभग 55 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसमें आधुनिक इमेजिंग इन्फ्रा-रेड तकनीक का उपयोग किया गया है, जो लक्ष्य को पहचानकर सटीकता से उसे नष्ट करने की क्षमता प्रदान करती है। इसकी गति ध्वनि के करीब होती है और यह भारी विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम है, जिससे बड़े युद्धपोतों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
NASM-SR पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिससे भारत की विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम होती है। यह विकास देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पहले भारत को इस प्रकार की एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं के लिए काफी हद तक बाहरी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था।
समुद्री युद्ध के परिदृश्य में यह मिसाइल छोटे युद्धपोतों, गश्ती नौकाओं और सप्लाई जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। इसकी कम ऊंचाई पर उड़ान और उन्नत तकनीक इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली में एक महत्वपूर्ण हथियार बनाती है।
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