
इंदौर। भागीरथपुरा कांड के बाद जहां शहरभर से नगर निगम को दूषित पानी की शिकायतें मिलने लगी, जो अभी भी जारी है, जिसके चलते सभी 22 झोनों और 85 वार्डों में नगर निगम ने ड्रैनेज और नर्मदा लाइनों का सर्वे करवाया, तो पता चला कि ऐसे 3 हजार ऐसे स्थान हैं पर जहां ये लाइनें आपस में क्रॉस हो रही है।
वार्ड पार्षदों द्वारा बिना किसी प्लानिंग के इस तरह की लाइनें डलवा दी जाती है और बाद में सडक़ खुदाई या अन्य कार्यों के चलते जब लाइनें डैमेज होती है तो ड्रैनेज की लाइन और नर्मदा की लाइन पास-पास होने या क्रॉस होने पर मिल जाती है और ड्रैनेज का पानी नर्मदा के साथ घरों तक पहुंच जाता है। नतीजतन अधिकांश क्षेत्रों में रहवासी दूषित पानी की शिकायतें करते रहते हैं। भागीरथपुरा कांड के बाद निगम ने जो सर्वे करवाया तो पता चला कि 55 से अधिक स्थान ऐसे हैं जहां पर लीकेज के कारण लाइनें मिली और दूषित पानी बंटा। इनमें महालक्ष्मी नगर से लेकर बाणगंगा, सुखलिया, नेहरू नगर, आजाद नगर, परदेशीपुरा, क्लर्क कॉलोनी से लेकर अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि निगम का दावा है कि जहां-जहां दूषित पानी की शिकायतें मिलीं वहां लाइनों को ठीक करवाया गया है और भागीरथपुरा में अभी भी यह प्रक्रिया जारी है। निगम का कहना है कि अमृत-2.0 के तहत जो चार पैकेज मंजूर किए गए हैं उनमें एक पैकेज शहरभर में बिछी पुरानी लाइनों की बजाय नई लाइनें डाली जाएगी और नर्मदा तथा ड्रैनेज की लाइनों में पर्याप्त दूरी भी रहेगी। हालांकि इस पूरी कवायद में कुछ वर्ष लगेंगे और पूरा शहर ही खोदना पड़ेगा। गलियों-मोहल्लों में ये लाइनें बिछी हुई है। इनमें सबसे अधिक मुसीबतें अवैध कॉलोनियों-बस्तियों में है। शहर में 500 से अधिक ऐसी अवैध बस्तियां-कॉलोनियां मौजूद हैं, जहां पर बाद में जनप्रतिनिधियों ने नर्मदा के साथ ड्रैनेज लाइनें डलवाई, जिनमें लीकेज सहित दूषित पानी की शिकायतें सबसे अधिक आती है। भागीरथपुरा कांड के चलते अब निगम इस तरह की कवायद कर रहा है।
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