
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर (Manipur) में एक बार फिर हिंसा (Violence) की घटना सामने आई है। म्यांमार सीमा (Myanmar Border) से सटे कामजोंग जिले (Kamjong District) के कई गांवों में बुधवार तड़के ड्रोन से हमले (Drone Attacks) किए जाने का दावा किया गया है। इस हमले में कई घरों में आग लग गई, एक महिला घायल हो गई और दो ग्रामीणों के लापता होने की सूचना है।
रात 2 बजे हुआ हमला, गांवों में मची अफरा-तफरी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना रात करीब दो बजे नामली मार्केट और चोरो गांव के आसपास हुई। आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने ड्रोन के जरिए विस्फोटक गिराए, जिसके बाद कई घरों में आग लग गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कुछ रिपोर्टों में म्यांमार आधारित उग्रवादी संगठन केएनए-बी (कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा) का नाम सामने आया है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों ने जंगलों में ली शरण, सुरक्षा बल तैनात
हमले के बाद कई ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए जंगलों और सुरक्षित इलाकों की ओर भाग गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है और पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती संवेदनशील इलाकों में पिछले कुछ समय से ड्रोन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आशंका पहले से जताई जा रही थी। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
बीरेन सिंह का बयान: ‘सीमा पार आतंकवादी हमला’
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस हमले को सीमा पार आतंकवादी हमला करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जलते घरों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि नामली, वांगली और चोरो गांवों पर हमला भारत-म्यांमार सीमा के पार से सक्रिय बाहरी ताकतों द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सीमा सुरक्षा मजबूत नहीं होगी और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक राज्य में स्थायी शांति संभव नहीं है।
मणिपुर में बढ़ती हिंसा से फिर तनाव
पिछले कुछ महीनों से मणिपुर के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में छिटपुट हिंसा, गोलीबारी और उग्रवादी गतिविधियों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कई जिलों में सुरक्षाबलों और सशस्त्र समूहों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल पुलिस, असम राइफल्स और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन और हमलावरों की पहचान के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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